उज्जैनमध्यप्रदेशसंघ शाताब्दी वर्ष

व्यक्ति, परिवार और समाज में बदलाव से ही राष्ट्र प्रगति करेगा: नरेंद्र कुमार

संघ के ‘प्रमुख जन संवाद’ में विचार संवाद पर जोर, ‘पंच परिवर्तन’ से समाज बदलाव का आह्वान


जनमत जागरण @ उज्जैन। “जब तक व्यक्ति, परिवार और समाज में सकारात्मक परिवर्तन नहीं होगा, तब तक राष्ट्र की वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।” यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र कुमार ने ‘प्रमुख जन संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल नीतियों से नहीं, बल्कि विचार और व्यवहार में बदलाव से संभव होता है।

रविवार को श्री धन्वंतरि आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में संभागभर से सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स, समाचार पत्रों के संपादक, ब्लॉगर और स्तंभकार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में सकारात्मक विचार निर्माण और संवाद को सशक्त बनाना रहा। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई तथा मंचासीन पदाधिकारियों का परिचय कराया गया।

मुख्य वक्ता नरेंद्र कुमार ने कहा कि आज के दौर में समाज केवल घटनाओं से नहीं, बल्कि उनके विश्लेषण और प्रस्तुतिकरण से अधिक प्रभावित होता है। ऐसे में लेखकों, संपादकों और विचारकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने संवाद, समन्वय और समाज जागरण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

🔶 परम वैभव का अर्थ: समृद्धि के साथ विश्व शांति का संदेश

नरेंद्र कुमार ने कहा कि संघ का उद्देश्य भारत को ‘परम वैभव’ तक पहुंचाना है। इसका अर्थ केवल आर्थिक उन्नति नहीं, बल्कि ऐसा राष्ट्र बनाना है जो विश्व को शांति, सहअस्तित्व और सांस्कृतिक मूल्यों का मार्ग दिखाए। भारत की शक्ति सदैव रचनात्मक रही है, जिसने कभी भी आक्रामकता के बजाय मानवता का संदेश दिया है।

🔶 ‘स्व’ का बोध: आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला

उन्होंने ‘स्व’ की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि स्वदेशी, स्वभाषा और स्वावलंबन को अपनाना आज की आवश्यकता है। अपनी मातृभाषा में हस्ताक्षर करना भी आत्मसम्मान का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में ‘स्व’ को व्यवहारिक रूप से अपनाएं, जिससे आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार हो सके।

🔶 परिवार और संस्कार: समाज की मूल शक्ति

उन्होंने भारतीय परिवार व्यवस्था को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि संस्कारों से ही समाज की दिशा तय होती है। आधुनिक तकनीक का उपयोग आवश्यक है, लेकिन उसका विवेकपूर्ण उपयोग भी उतना ही जरूरी है। यदि परिवार सशक्त रहेगा तो समाज और राष्ट्र दोनों मजबूत होंगे।

🔶 ‘पंच परिवर्तन’: समाज परिवर्तन का व्यावहारिक मॉडल

नरेंद्र कुमार ने ‘पंच परिवर्तन’ के पांच सूत्र—सामाजिक समरसता, स्व का बोध, सशक्त परिवार, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य—को समाज परिवर्तन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि जाति, भाषा या अन्य आधारों पर भेदभाव समाप्त कर समरस समाज का निर्माण करना होगा। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और अनुशासित नागरिक जीवन भी आवश्यक है।


प्रश्नोत्तर सत्र: जिज्ञासाओं के मिले स्पष्ट और सारगर्भित उत्तर

कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में उपस्थित संपादकों, ब्लॉगरों और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यप्रणाली, दृष्टिकोण और समसामयिक विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं रखीं। मुख्य वक्ता नरेंद्र कुमार ने सभी प्रश्नों का सहज, स्पष्ट और तर्कसंगत उत्तर देते हुए संघ की विचारधारा और कार्यशैली को विस्तार से समझाया।प्रश्न 1: संघ के कार्यक्रमों में फोटो या वीडियो लेने को लेकर संकोच क्यों देखा जाता है?

उत्तर: नरेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि यह धारणा पुराने समय की है, जब संघ प्रचार-प्रसार से दूर रहता था। वर्तमान में सार्वजनिक कार्यक्रमों में सोशल मीडिया का उपयोग स्वीकार्य है। केवल कुछ आंतरिक बैठकों में ही सीमितता रखी जाती है, ताकि सहभागी बिना किसी दबाव के खुलकर संवाद कर सकें। सामान्य कार्यक्रमों में अनुशासन का पालन करते हुए फोटो और वीडियो लेना पूरी तरह स्वीकार्य है, इसलिए इसे लेकर किसी प्रकार का भ्रम नहीं रखना चाहिए।प्रश्न 2: भ्रष्टाचार के खिलाफ संघ की क्या भूमिका है?

उत्तर: उन्होंने कहा कि संघ का मूल कार्य व्यक्ति निर्माण है। शाखा के माध्यम से ऐसे संस्कार दिए जाते हैं, जिससे स्वयंसेवक अपने जीवन में ईमानदारी और नैतिकता को अपनाएं। संघ संगठन के रूप में आंदोलन नहीं करता, लेकिन उसके स्वयंसेवक समाज में चल रहे सकारात्मक अभियानों का समर्थन करते हैं। उनका मानना है कि भ्रष्टाचार के स्थायी समाधान के लिए चरित्र निर्माण सबसे प्रभावी उपाय है।प्रश्न 3: युवाओं को स्वरोजगार के लिए संघ किस प्रकार सहयोग करता है?

उत्तर: नरेंद्र कुमार ने बताया कि संघ सीधे तौर पर रोजगार योजनाएं संचालित नहीं करता, लेकिन स्वावलंबन और स्वदेशी के विचार के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करता है। विभिन्न सामाजिक और वैचारिक मंचों के जरिए युवाओं में उद्यमिता की भावना विकसित की जाती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर राष्ट्र की आर्थिक प्रगति में योगदान दे सकें।प्रश्न 4: विद्यार्थी परिषद और संघ के कार्य में क्या अंतर है?

उत्तर: उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थी परिषद का कार्यक्षेत्र मुख्यतः छात्रों और शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित है, जहां वह छात्र नेतृत्व और समस्याओं पर काम करती है। वहीं, संघ का कार्य व्यापक है, जो व्यक्ति के संपूर्ण जीवन में संस्कार निर्माण पर केंद्रित रहता है। दोनों के उद्देश्य समान हैं—जागरूक और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना।प्रश्न 5: हिंदू एकता के लक्ष्य की प्रगति को किस प्रकार मापा जा सकता है?

उत्तर: इस प्रश्न पर उन्होंने कहा कि इसे किसी प्रतिशत या आंकड़े में मापना संभव नहीं है। समाज में बढ़ती जागरूकता, अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व और बड़े सामाजिक परिवर्तनों को देखकर इसकी प्रगति को समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह एक सतत प्रक्रिया है, जो सामूहिक प्रयासों से ही साकार होगी।प्रश्न 6: सोशल मीडिया पर बढ़ते नकारात्मक कंटेंट को कैसे रोका जा सकता है?

उत्तर: नरेंद्र कुमार ने कहा कि इसका सबसे प्रभावी उपाय है—स्वयं सकारात्मक और संस्कारित कंटेंट का निर्माण करना। नकारात्मक सामग्री को न बढ़ावा दें और ऐसे प्लेटफॉर्म्स या हैंडल्स को रिपोर्ट करें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन समाज की जिम्मेदारी उससे भी अधिक है। जितना अधिक सकारात्मक कंटेंट बढ़ेगा, उतना ही नकारात्मक प्रभाव स्वतः कम होगा।


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