नलखेड़ा का बगलामुखी का मंदिर तंत्र साधना के लिए माना जाता है आदर्श स्थान

पाण्ड़व कालीन है बगलामुखी का मंदिर
नवरात्रि में उमड रहा श्रद्धालुओं का सैलाब
जनमत जागरण न्यूज @ नलखेड़ा
नलखेड़ा नगर का धार्मिक दृष्टि से बड़ा महत्व है तांत्रिक साधना के लिए उज्जैन शहर के बाद नलखेड़ा नगर मे स्थित मां बगलामुखी मंदिर का नाम आता है मां बगलामुखी का मंदिर एक कच्ची प्राकृतिक एवं रमणीक स्थल के नाम से भी जाना जाता है मां बगलामुखी के दर्शन के लिए देश ही नहीं विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं और मां के दर्शन कर लाभान्वित होते हैं यहां के भक्तों का कहना है कि सच्चे हृदय से मां से जो भी मांगा जाता है वह जरूर मिलता है। आश्चर्य की बात तो यह है कि हिंदू समुदाय के साथ साथ कई मुस्लिम धर्म के लोग भी मां के दर्शन के लिए आते हैं। मां बगलामुखी मंदिर के अलावा एक और पूर्व दिशा में महाभारत कालीन प्रसिद्ध श्री बल्डावदा हनुमान मंदिर है। यह मूर्ति महाभारत काल की है नगर के मध्य पंचमुखी हनुमान और प्रसिद्ध श्री खेड़ापति हनुमान विराजमान है नगर से बाहर निकलते ही विघ्न विनाशक मंगल मूर्ति भगवान श्री गणेश जी महाराज की विशाल प्रतिमा विराजमान है जो अति प्राचीन है नगर के उत्तर पश्चिम में लक्ष्मण नदी जो वर्तमान में लखुंदर नदी के नाम से प्रख्यात है नदी के तट पर सिद्ध पीठ पीतांबरा मां बगलामुखी माता विराजमान है कहा भी गया है कि
सदा भवानी दाहिने, सम्मुख होत गणेश।
पांच देव रक्षा करें ब्रम्हा विष्णु महेश।
विश्व प्रसिद्ध पीताम्बरा सिद्ध पीठ माॅ बगलामुखी की मूर्ति महाभारत कालीन है जो कि भीम पुत्र बरबरी द्वारा स्थापित की गई थी। यहाॅ पांडवों ने महाभारत के युद्ध में कोरवो को हराने के लिए भगवान कृष्ण के कहने पर ही मां बगलामुखी की आराधना कर विजयश्री का वरदान प्राप्त किया था। माॅ बगलामुखी का वर्णन कालीपुराण में मिलता है। वर्ष की दोनो नवरात्रि के दौरान इस मंदिर पर भक्तों का ताता लगा रहता हैं वही शारदीय नवरात्रि के दौरान तंत्र साधना के लिए तांत्रिकों का जमावड़ा भी यहां लगा रहता है।
मंदिर में विराजित है त्रिशक्ति माॅ
आगर जिला मुख्यालय से 35 कि.मी. दूर नलखेड़ा में पीताम्बरा सिद्धपीठ माॅ बगलामखी का मंदिर है जहाॅ त्रिशक्ति माॅ विराजीत है बीच में माॅ बगलामुखी] दाएॅ माॅ लक्ष्मी तथा बाएॅ माॅ सरस्वती। मां बगलामुखी मंदिर के बाहर 16 खंभों वाला एक सभा मंडप दिए जो विक्रम संवत 1815 सन 1759 मे पंडित इम्बुजी ने दक्षिणी कारीगर तुलाराम से बनवाया था मंदिर के ठीक सामने एक दीपमालिका बनी हुई है मंदिर के अहाते में ही हनुमान मंदिर, गोपाल मंदिर व काल भैरव मंदिर भी है मंदिर का मुख्य द्वार सिंह मुखी है तथा मंदिर के पास ही दो शिवालय स्थित है मंदिर परिसर में नीम पीपल चंपा चमेली आदि के पेड़ है जो साक्षात मां के होने का प्रमाण है।
दस महाविद्याओं में बगलामुखी का है विशेष महत्व
प्राचीन तंत्र ग्रंथों में दस महाविद्याओं का उल्लेख मिलता है। उनमें से एक है माॅ बगलामुखी। माॅ भगवती बगलामुखी का महत्व समस्त देवियो में सबसे विशिष्ट है।
शास्त्र के अनुसार इस देवी की साधना आराधना से शत्रुओं का स्तम्भ हो जाता है यह साधक को भोग और मोक्ष दोनो ही प्रदान करती है।
सोमवार को उमडा भक्तों का सैलाब
विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर पर सोमवार को भी भक्तों का सैलाब उमड़ा सोमवार को करीब 15 हजार से अधिक लोगों ने मां के दर्शन कर पुण्य लाभ लिया। वहीं कहीं भक्तों द्वारा अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए हवन पूजन भी करवाए गए



