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नगर में बिना परमिशन बन गए कई मकान एवं अवैध निर्माण, परमिशन शर्तों का पालन नहीं करते जिम्मेदार

जनमत जागरण न्यूज @ नलखेड़ा

नगरीय निकाय क्षेत्र में नियम-कायदों को ताक पर रखकर कई आवासीय एवं व्यावसायिक भवन निर्माण कार्य बिना परमिशन कराए धड़ल्ले से हो रहा है, जिससे जहां एक तरफ नगर परिषद् को हर साल लाखों रुपए का राजस्व का घाटा उठाना पड रहा है, वहीं दूसरी तरफ अनियोजित बसाहट के कारण कस्बे की सूरत बिगड़ने के साथ ही आमजन की परेशानियां बढ़ती जा रही है। गौर करने वाली बात यह है कि नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी खुद स्थिति से वाकिफ होने के बावजूद अपने कर्तव्यों से पल्ला झाड़ लेते हैं।
खुद का मकान हर व्यक्ति का सपना होता है। मकान बनाने से पहले काफी तैयारी करता है। वह प्राइवेट इंजीनियर से नक्शा भी बनवाता है। नियमानुसार नक्शे को नगर परिषद से स्वीकृत कराना अनिवार्य होता है, लेकिन पैसे बचाने के लालच में लोग बनवाए गए नक्शे को पास नहीं करवाते हैं, एवं बिना परमिशन मनमर्जी से भवन निर्माण कराते हैं। जो लोग नक्शा पास करवाते हैं, तो नक्शे के अनुसार काम नहीं करवाते हैं। स्वीकृत नक्शे के बजाय निर्माण का दायरा बढ़ाकर सड़क व आसपास की खाली जमीन पर भी मकान खड़े किए जा रहे हैं। कई नागरिक एक मंजिल की परमिशन लेते है, एवं निर्माण के वक्त द्वितीय एवं तृतीय मंजिला इमारत बना लेते है। ऐसे में नक्शा पास कराना और नहीं कराना बराबर हो जाता है।

नगरीय विकास के साथ नलखेड़ा कस्बे का विस्तार तेजी से हो रहा है। कस्बे में हर साल अच्छी संख्या में नए मकान और व्यावसायिक परिसर बन रहे हैं। मकान बनाने से पूर्व नियमानुसार नगर परिषद से अनुमति और नक्शा पास कराना जरूरी है, लेकिन कस्बे में ज्यादातर लोग भवन निर्माण से पहले नगर परिषद से परमिशन और नक्शा पास नहीं करवाते हैं। दरअसल अनुमति शुल्क जमा कराने के बाद भवन पंजीकृत हो जाता है। जिससे संपत्तिकर की वसूली होने लगती है। यही वजह है कि नक्शा पास कराने की शुल्क और संपत्तिकर को बचाने के चक्कर में ज्यादातर बिना परमिशन मनमाफिक तरीके से मकान निर्माण करा लेते हैं। लोग नगर परिषद् से नक्शा पास कराना ही जरूर नहीं समझते हैं। नगर परिषद् क्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी नगर परिषद के सब इंजीनियरों की है। लेकिन सब इंजीनियर इस दिशा में सक्रिय रवैया नहीं अपनाते हैं। इस वजह से हर साल नगर परिषद् को लाखों रूपए का राजस्व घाटा उठाना पडता है।

कुछ नागरिक भवन बनाने से पूर्व नक्शा पास कराने की अनिवार्यता को देखते हुए नक्शा पास तो करा लेते हैं, लेकिन नगर परिषद द्वारा परमिशन के लिए लगाई गई शर्तों का पालन कराने पर जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं। वहीं आमतौर पर भवन निर्माता को भी इस बात से कोई सरोकार नहीं होता है कि मकान बनाते समय कहां कितनी जगह छोडना जरूरी है, पानी का निकास कहां से करना है, छत का पानी कहां गिरना चाहिए। लोगों की कोशिश रहती है कि उनकी एक इंच भी जगह भी नहीं छूटना चाहिए और सरकारी जगह को भी अपने हिस्से में लिया जाए। इस लालच में भवनों के हिस्से सडक तक आ जाते हैं, जिससे दूसरे लोगों के लिए कई समस्याएं पैदा होती है।

परिषद को संपत्तिकर में लाखों का घाटा
नगर परिषद की परमिशन और नक्शा स्वीकृत कराए बिना मकान-दुकान बनाने का सीधा नुकसान नगर परिषद को राजस्व घाटे के रूप में उठाना पड़ता है। जब नक्शा स्वीकृत नहीं होगा, तो न तो परमिशन शुल्क मिलेगा और न ही आगे चलकर संपत्तिकर की राशि मिलेगी। इससे नगरीय निकाय को हर साल लाखों रुपए के राजस्व की चपत लग रही है, जिसके कारण नगरीय विकास के कई लाभदायक कार्यो, एवं नागरिकों को दी जाने वाली सुविधाओं हेतु नगर परिषद् के पास सुनियोजित राशि की कमी रह जाती है।
जब इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों से चर्चा करनी चाही तो उन्हौने फोन रिसिव नहीं किया।

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