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देशभक्तो के बलिदान से मिली हमे आजादी, मुफ्त में नही मिली

सोयतकलां में ह्रदय स्थल माधव चौक में मनाया शहीद दिवस:अमर शहीद भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु को दी श्रद्धांजलि

जनमत जागरण न्यूज़ @ सोयत कलां
स्व को पहचान कर स्वाधीनता, स्वावलंबन भारत के निर्माण में हमे वीरो से प्रेरणा लेना चाहिए तथा उन गुमनाम शहीदों का स्मरण करना चाहिए जो सर्वस्व राष्ट्र को समर्पित कर गए, हमे आजादी मुफ्त में नही मिली बल्कि हजारो देशभक्त के बलिदान से मिली है उक्त बात हमें बुधवार को माधव चौक में स्वराज अमृत महोत्सव कार्यक्रम में मुख्य वक्ता द्वारकी लाल पाटीदार शिक्षक ने कही ।

सोयतकलां नगर क्षेत्र में बुधवार को स्वराज्य के अमृत महोत्सव में 23 मार्च शहीद दिवस पर मशाल प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि का कार्यक्रम आयोजित किया गया , जिसमे शहीदो की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। जिसमें मुख्य वक्ता द्वारकीलाल पाटीदार शिक्षक एवं बृजमोहन सोनी प्राचार्य सरस्वती विद्या मंदिर की अध्यक्षता में संपन्न हुआ कार्यक्रम की भूमिका जितेन्द्र शर्मा जिला समिति के सदस्य के द्वारा रखी गई ।

अध्यक्षीय आशीर्वचन में हमें राष्ट्र के प्रति सजग रहकर राष्ट्र हित में लगे रहना चाहिए। और भारत विश्व का सबसे ज्यादा युवा जनसंख्या वाला देश है और युवा ही राष्ट्र का निर्माता है।

मुख्य वक्ता ने आगे कहा कि अगर युवा अपनी शक्ति और सामर्थ्य का सही ढ़ंग से सही दिशा में अपनी मातृभूमि के लिए उपयोग करे तो भारत पुनः अपनी आध्यात्मिक, सामाजिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर विश्व का नेतृत्व कर सकता है। उन्होंने शहीद भगत सिंह के जीवन को याद करते हुए कहा कि भगत सिंह भी एक अच्छे कॉलेज में पढ़ते थे और उन्होंने आंदोलन में भाग लेने के लिए उन्होंने अपने कॉलेज को छोड़ा, अगर वो भी अपने करियर की चिंता के लिए लगे रहते तो देश में जो क्रांति की मशाल जलाने का काम उनके बलिदान ने किया वो न हो पाता।

देश आज अपने तीन अमर शहीदों को याद कर रहा है. साल 1931 में आज ही के दिन शहीद-ए-आजम भगत सिंह , रागुजरु और सुखदेव को लाहौर के सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई थी. देश तीनों स्वतंत्रताओं की स्मृति में आज शहीद दिवस मना रहा है. ।

ब्रिटिश सरकार ने तीनों क्रांतिकारियों को 23 मार्च के दिन फांसी के फंदे पर लटका दिया था. जिस जगह फांसी दी गई थी वह अब पंजाब में है. भगत सिंह की शहादत के बाद से ही देश में स्वाधीनता संग्राम के लिए आंदोलन तेज हो गए थे. तीनों क्रांतिकारियों ने अत्याचारी अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ाई थी. भारत माता के लिए उन्होंने अपने जान की कुर्बानी दी थी. युवाओं के लिए भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव आज भी सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत हैं. जनता के बीच तीनों बेहद लोकप्रिय हैं ।

कार्यक्रम का आभार त्रिलोक जायसवाल ने माना और कार्यक्रम में सोयत नगर के गणमान्य नागरिक, राजनेतिक सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता तथा पत्रकार गण उपस्थित थे ।

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