झालावाड़राजस्थान

नाम वापसी के बाद स्पष्ट होगा सुसनेर विधानसभा का परिदृश्य

परंपरागत वोट बैंक में भी भाजपा-कांग्रेस के कार्यकर्ता प्रत्याशीयों से नाराज

जनमत जागरण @ सुसनेर से संजय जैन की रिपोर्ट

आज 2 नवंबर को नाम वापसी के बाद सुसनेर विधानसभा में चुनाव का परिदृश्य स्पष्ट हो जाएगा। वर्तमान में भाजपा और कांग्रेस के एक-एक नेता बागी होकर निर्दलीय के तौर पर नामांकन दाखिल कर चुके है। वर्तमान में तो विधानसभा क्षेत्र में मतदाता का चुनाव को लेकर कोई उत्साह नहीं दिख रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि वोटर अपनी पार्टी के प्रति मतदान का मन बना चुके है। इस सीट पर हार-जीत का समीकरण तय करने वाले सौंधिया और पाटीदार समाज के मतदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। इसी के साथ इस बार ये भी माना जा रहा है कि इन दोनों जातियों के बीच एससी-एसटी के वोटर भी इस बार चुनावी फैसले में अपनी भूमिका अदा कर सकते है। क्यों कि सौंधिया समाज के वोटरों की संख्या 35 से 40 हजार के बीच है तो पाटीदार समाज की संख्या 35 हजार के लगभग है तो वही एससी-एसटी के वोटरों की संख्या 60 से 70 हजार के लगभग है। इसके अतिरक्त इस बार ढुलमुल वोटर भी शामिल होंगे। इन्हे ढुलमूल वोटर इसलिए कहां जाता है कि कभी ये व्यक्ति देखकर या कभी पार्टी देखकर तो कभी अपने हित देखकर वोट करते है। ऐसे वोटरों की संख्या में सुसनेर विधानसभा में अच्छी खासी है। ऐसा माना जा रहा है कि सौंधिया और पाटीदार समाज इस बार अपनी-अपनी समाज के प्रत्याशी को वोट देंगे। चाहे वह किसी भी पार्टी का हो तो वही दूसरी और यह बात भी सामने आ रही है कि क्षेत्र में वर्षो से कांग्रेस का दामन थामकर कार्य करने वाले जीतू पाटीदार जो कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय मैदान में है, अपनी समाज के अलावा एससी-एसटी व अन्य के वोटरो को भी साधने के प्रयास में जूट गए है। खैर जो भी हो आज स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। उसके बाद कोन किसको साधता है इसका फैसला तो बाद में पता चल ही जाएगा।

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