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मैं बोझ नहीं हूं मां.. मुझको यूं कोख में ना मारो तुम ..! कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम का गांव- गांव यह संदेश देने व सरकार से कानून बनवाने निकला ‘माटी का लाल’ पद यात्री प्रजापति

कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम के लिए कन्याकुमारी से दिल्ली तक पैदल यात्रा, 2100 किलोमीटर पैदल चलकर सोयतकलां पहुंचे माटी के लाल प्रजापति


जनमत जागरण @ सोयतकलां
मैं बोझ नहीं हूं मां मुझको यूं कोख में ना मारो तुम एक मां को अजन्मी बेटी की पुकार … गांव गांव यह संदेश देते हुए । कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम के लिए कन्याकुमारी से दिल्ली तक पैदल यात्रा करने वाले 2100 किलोमीटर पैदल चलकर गुरुवार को माटी के लाल 42 वर्षीय चेन्नस महादेव प्रजापति सोयतकलां पहुंचे, यहां पर नगर वासियों ने उनका स्वागत किया । पैदल यात्री प्रजापति ने कहा कि पुरुषों को बेटियो को सम्मान देना चाहिए। क्योंकि बेटी ही मां बनकर सृष्टि की संरचना करती है। अगर नारी न हो तो सृष्टि ही खत्म हो जाए। देश में घटते लिंग अनुपात को समाप्त करने और कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए लड़के और लड़की में भेदभाव को बंद करना होगा। कब तक भ्रूण रुप में लड़की को गटर में फेंक कर उसकी बलि चढ़ाई जाती रहेगी । हम सब को मिलकर इस बीमार मानसिकता को बदलना होगा।
बता दें कि गैर-कानूनी लिंग परीक्षण और बालिका शिशु की समाप्ति के लिये भारत में दूसरा बड़ा कारण गर्भपात की कानूनी मान्यता है। तकनीकी उन्नति ने भी कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा दिया है। भ्रूण या कोई भी लिंग प्रशिक्षण भारत में गैर कानूनी है। यह उन माता-पिता के लिए बहुत ही शर्म की बात है जो लड़का ही चाहते हैं। माता-पिता के साथ-साथ चिकित्सक भी खासतौर पर पैसों के लिए गर्भपात कराने में मदद करते हैं।

*आयुषी योजना लागू हो इसलिए कर रहे हैं पैदल यात्रा
24 सितंबर 2023 को कन्याकुमारी से पैदल चलकर 58 दिनों में 2100 किलोमीटर की यात्रा कर 22 नवंबर को सोयतकलां पहुंचे । 42 वर्षीय चेन्नस महादेव प्रजापति ने बताया कि रोजाना 35 से 40 किलोमीटर पैदल चलकर गांव-गांव भ्रूण हत्या बंद हो, भ्रूण हत्या महापाप है का संदेश दे रहे हैं । यहां से पैदल यात्रा करते हुए 10-11-12 दिसंबर तक दिल्ली पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को भ्रूण हत्या की रोकथाम के लिए तथा बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए 2014 में जो आयुषी योजना बनाकर दी थी, उसको लागू करने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचेंगे।

*कन्या भ्रूण हत्या महापाप है एक दशक से दे रहे हैं संदेश

2014 से भ्रूण हत्या पर रोक लगे और इसकी जागरूकता के लिए समाज में विभिन्न कार्यक्रम चलाकर जागरूकता फैला रहे हैं प्रजापति ने बताया कि 1 सितंबर 2017 को भी गांव से 300 किलोमीटर पैदल चलकर बेंगलुरु में स्वास्थ्य मंत्री को आयुष योजना की रिपोर्ट देने के लिए पदयात्रा की थी और अब आयुषी योजना लागू करने के लिए पैदल यात्रा करते हुए प्रधानमंत्री जी से मिलेंगे ।
*2014 में योजना बना कर दी राज्य सरकार को रिपोर्ट नहीं पहुंची केंद्र सरकार के पास
प्रजापति ने बताया कि 2014 में भ्रूण हत्या बंद हो इसके लिए आयुषी योजना बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र जी मोदी को दी थी । पिछले दस साल से कर्नाटक राज्य सरकार की ओर से इस परियोजना पर कोई रिपोर्ट केंद्र सरकार को नहीं सौंपी गयी है । राज्य के संसद सदस्यों से इस मामले को मानसून सत्र में रखने का अनुरोध किया गया है और चूंकि हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है । इस कारण हम लोगों का जनमत संग्रह कर पैदल यात्रा कर प्रधानमंत्री जी से मिलेंगे ।
*आयुषी योजना के फ़ायदे
कन्या भ्रूण हत्या पर नियंत्रण, माता-पिता की उपेक्षा से बच्चों की सुरक्षा, बच्चों की बिक्री पर नियंत्रण, बच्चों की चोरी, अनिवार्य शिक्षा, बाल श्रम पर नियंत्रण, बाल विवाह पर नियंत्रण, अनिवार्य विवाह पंजीकरण
*पैदल यात्रा उदेश्य
कन्या भ्रूण नियंत्रण और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए मां और भ्रूण को एक डिजिटल कोड देने की गुहार लगाने के लिए कन्याकुमारी से दिल्ली तक पैदल कर प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचेंगे । कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम और बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए गर्भावस्था रजिस्ट्री को अनिवार्य बनाने के लिए अधिनियम में संशोधन करें । मदर डिजिटल कोड जारी करने के लिए एक योजना प्रस्तुत की गई थी । परियोजना का उद्देश्य नागरिकों के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाना और मां और भ्रूण को डिजिटल कोर्ट देना है और जन्म के बाद बच्चे का नंबर, शैक्षिक नंबर नागरिक पहचान पत्र और रिकॉर्ड जारी होने तक जारी रहेगा। योजना में मां भ्रूण को डिजिटल कोड देना, मदर डिजिटल कोड जारी करना तथा कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम और बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए गर्भावस्था रजिस्ट्री को अनिवार्य बनाने के लिए अधिनियम में संशोधन करने के लिए आयुषी योजना बनाकर दे चुके हैं ।

*भ्रूण हत्या का प्रायश्चित नहीं है पुराणों में
कथा व्यास पं. राधेश्याम दुबे ने वार्ता में कहा कि – नारी को लक्ष्मी, दुर्गा व सरस्वती के रुप में पूजा जाता है। भारतीय संस्कृति ने सदैव नारी को पुरुष से बढ़कर अधिकार दिए हैं। प्रत्येक बेटी का पिता होता है, लेकि न जरुरी नहीं कि हर पिता को बेटी हो। बेटी बोझ नहीं होती है। गर्भ में पल रही बच्ची जानकर जन्म के पूर्व ही मार देना, भ्रूण हत्या करना ऐसा पाप है जिसका प्रायश्चित पुराणों में भी नहीं है।

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