•• यह है मध्यप्रदेश का एकमात्र ‘आस्था’ का केंद्र है शक्तिपीठ ‘आशापुर्णा मंदिर: यहां होती है भक्तों की मनोकामना पूरी

- अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:15 गुरुपुख नक्षत्र में
- सोने की पिचवाई में होगी प्राण प्रतिष्ठा
- आशापुरा माताजी के प्रतिष्ठा महोत्सव में उमड़ेगा आस्था का सैलाब
- यहां होंगे विभिन्न धार्मिक आयोजन
- नवनिर्मित मंदिर की 22 फरवरी को होगी प्राण प्रतिष्ठा
- अष्टदेवी के रूप मे आज तक यह प्रतिमा पिंडी रूप में यहां पर विराजित है मां

जनमत जागरण @ अध्यात्म डेस्क BASANT PANCHMI 2024 : आगर जिला मुख्यालय से 70 किमी दूर चर्मण्वती नदी (चंवली नदी) के पास स्थित मध्य प्रदेश का एकमात्र आस्था का केंद्र ‘शक्तिपीठ’ मां आशापुरा मंदिर, 333 साल से भी पुरानी मूर्ति है। मां आशापूर्णा तीर्थ क्षेत्र गुराडिया (सोयत) पर दिनांक 18 फरवरी से 24 फरवरी तक मां आशापूर्णा के नवनिर्मित भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित होगा ।
नवनिर्मित मंदिर में नूतन विग्रह की होने जा रही प्राण प्रतिष्ठा के निमित्त शक्तिपीठ आशापूर्णा मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को दिव्याता और भव्यता के साथ मनाने की तैयारियां जोर-जोर से चल रही है । कुल देवी मां आशापुरा मंदिर जन-जन का आस्था का धाम बना हुआ है । मान्यता है कि आशापुरा मंदिर के दरबार में पहुंचने वाले हर भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है। हर साल नवरात्रि पर मां के दरबार में भक्तों का तांता लगा रहता है।

•• संतो के सान्निध्य में होगी प्राण प्रतिष्ठा प्राण प्रतिष्ठा समारोह परम पूज्य सदगुरु देव भगवान अनंत गुरु विभूषित श्री गुरुशरणानंद जी महाराज रमणरेती धाम गोकुल की पावन उपस्थिति में सानिध्य में संपन्न होगा । समारोह में संपूर्ण भारतवर्ष के विभिन्न प्रांतो एवं विदेशों से पालीवाल समाज के बंधु सपरिवार एवं क्षेत्र के सभी नगरों गांव के श्रद्धालु हजारों की संख्या में उपस्थित रहेंगे ।
•• चर्मण्वती नदी (चंवली नदी) में से प्राकट्य हुई थी अष्ट देवी की प्रतिमा :: शक्तिपीठ आशापुरा मंदिर के पुजारी पंडित गोपाल कृष्ण शर्मा तथा पुजारी घनश्याम जी शर्मा ने बताया कि संवत् 1747 में मां आशापुर्णा का प्राकट्य हुआ था । सेठ शंभूराम पालीवाल गुराडिया को माता जी ने मूर्ति स्थापना का स्वप्न दिया था । तांबे के पात्र में पानी में डुबोकर रख दिया उसके बाद पूजा अर्चना की गई फिर स्वयं माताजी उस पात्र में आकर विराजमान हो गई । अष्टदेवी के रूप में जब से लेकर आज तक यह प्रतिमा पिंडी रूप में यहां पर विराजित है । बाद में 1830 संवत् में दुर्गा प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी । आपको बता दें कि गुराडिया मध्यप्रदेश राजस्थान की सीमा पर स्थित होने के कारण बहुत बड़ा व्यापारिक केंद्र था यहां पर बुधवार का हाट बाजार लगता था । सेठ शंभूराम पिता भेरुलाल जी के यहां के बड़े व्यापारी थे । यहां पर भक्तों की कई की आशाएं पूरी हुई निसंताने को संतानें मिली ।
•• मध्य प्रदेश का एकमात्र आस्था का केंद्र है शक्तिपीठ आशापूर्णा मंदिर :: भारतवर्ष में मां आशापूर्णा की पांच प्रमुख शक्तिपीठ है जिसमें से एक गुजरात और तीन राजस्थान तथा एक मध्यप्रदेश के आगर जिले के ग्राम गुराडिया सोयत में स्थित है आज से लगभग ढाई सौ वर्ष पूर्व पालीवाल समाज के बंधु कुलधरा एवं आसपास के क्षेत्र से विस्थापित होकर जब विभिन्न स्थान से होते हुए गुराडिया पहुंच कर यही निवास करने लगे तब कुलदेवी मां आशापूर्णा ने स्वप्न देकर यहां आने की इच्छा व्यक्त की एवं मां आशापूर्णा स्वयं यहां प्रसिद्ध चर्मण्वती वर्तमान नाम चंवली नदी में प्रकट हुई

•• ऋषि चर्मण्य के चिमटे से प्रकट हुई थीं की चर्मण्वती नदी (चंवली नदी) :: मध्यप्रदेश एवं राजस्थान की सीमा रेखा चर्मण्वती वर्तमान नाम चवंली नदी, इसके बारे में किवदंति है कि राजस्थान के पिडावा के जंगलों में ऋषि चर्मण्य तपस्या करते थे वृद्धावस्था होने पर उन्होंने अपने चिमटे से गंगा जी प्रकट की जिसकी धारा बहकर चर्मण्वती कहलाई । यह आस्था का केंद्र शक्तिपीठ आशापूर्णा मंदिर इसी नदी के किनारे मध्य प्रदेश के आगर जिले में बना हुआ है। यह मंदिर अपनी भव्यता विशालता कलात्मक की दृष्टि से मध्य प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में गिना जाएगा ।

-धौलपुर के पत्थर व संगमरमर से भगवान विश्वकर्मा द्वारा लिखे गए शिल्प शास्त्र के अनुरूप निर्माण हुआ है नवनिर्मित शक्तिपीठ मां आशापुरा का धाम :: मंदिर का निर्माण धौलपुर एवं संगमरमर के सुंदर नक्शीदार पत्थरों से भगवान विश्वकर्मा द्वारा लिखे गए शिल्प शास्त्र के अनुरूप, मंदिरों का निर्माण करने वाले सोमपुरा बन्धुऔ द्वारा किया गया है संपूर्ण निर्माण शास्त्र सम्मत किसी प्रकार का लोहे का उपयोग नहीं करते हुए हजारों वर्षों के स्थायित्व के साथ गहरी नींव में पृथ्वी पर मंदिर का भार सहन करने वाले देवता एवं विभिन्न दिशाओं के देवताओं का आव्हान के साथ स्थापित कर किया गया है ।

•• ऐसा रहेगा पूरा कार्यक्रम- मां आशापूर्णा का भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव
• मां आशापूर्णा धाम गुराडिया सोयत पर विगत 10 वर्षों से निर्माणाधीन भव्य मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह दिनांक 17 फरवरी को गंगाजल यात्रा एवं 18 फरवरी से शतचंडी महायज्ञ के साथ प्रारंभ होगा ।
• 22 फरवरी को कुलदेवी मां आशापूर्णा की नवनिर्मित भव्य मंदिर में अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:15 पर विधि विधान के साथ विद्वान पंडितो द्वारा मंत्र उच्चारण के साथ प्रतिष्ठा की जाएगी ।
• शिखर पर पूजा अर्चना के साथ स्वर्ण कलश का आरोहण एवं 15.6 फुट ऊंचे विशाल स्वर्ण की आभा लिए ध्वज दंड पर पताका लहराई जाएगी ।
• 18 फरवरी अग्नि स्थापन से प्रारंभ शतचंडी महायज्ञ एवं कुलदेवी मां आशापूर्णा का प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान प्रारंभ होगा । विभिन्न चरणों में प्रतिदिन अन्नाधिवास ,जलाधिवास पुष्प वर्षाधीवास अनुष्ठान होगा।
• 21 फरवरी को शय्याधिवास ,महास्नापन, महा अभिषेक एवं बिंदोरी, रथारोहण के साथ नगर में रथ यात्रा निकाली जाएगी ।
• 22 फरवरी को शुभ मुहूर्त गुरुपुख नक्षत्र में अभिजीत मुहूर्त में कुलदेवी मां की विशाल गर्भ ग्रह में भव्य सोने की पिचवाई, महल के बीच संगमरमर के सुंदर सिंहासन पर प्रतिष्ठा की जाएगी ।
• 22 फरवरी को सायंकाल 5 बजे विशाल महाप्रसादी भंडारे का आयोजन होगा ।



