आस्थाआगर मालवादेशमध्यप्रदेश

“अपराजेय साधक” पंचतत्व में विलीन: पूरा नगर हुआ भाव-विह्वल , आचार्यश्री के चित्र शोभा यात्रा निकालकर अर्पित की विनयांजलि

• " विद्या सागर जी अमर रहे .. उद्घोष से गूंजा नगर • छत्तीसगढ़ डोंगरगढ़ के चन्द्रगिरि तीर्थ पर संलेखना पूर्वक किया समाधिमरण समाधिमरण कर संतत्व से सिद्धत्व की यात्रा का किया समापन 

जनमत जागरण @ सुसनेर से दीपक जैन की लाइव रिपोर्ट :: संपूर्ण विश्व में जैन समाज के लिए आज का दिन सबसे कठिन है । समाज के वर्तमान के महावीर कहे जाने वाले आचार्य विद्यासागर महाराज ने देह त्याग दी और पूरी विधि के साथ समाधि ली । अपराजेय साधक के पंचतत्व में विलीन होने के बाद पूरा नगर भाव-विह्वल हुआ । इस अविस्मरणी क्षण के बाद स्थानीय जैन समाज व आचार्य श्री के भक्तों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रख दोपहर को नगर में उनके चित्र की शोभायात्रा निकालकर विनयांजलि अर्पित की।

👉 ⏩ एक अपराजेय साधक : सुसनेर से स्पेशल लाइव रिपोर्ट देखने के लिए युटुब लिंक को क्लिक करें देखें HD क्वालिटी में यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें ।

“जब तक सूरज चांद रहेगा विद्या सागर नाम रहेगा…” विद्या सागर नाम हमे प्राणों से प्यारा… ” विद्या सागर जी अमर रहे …जैसे उद्घोषों के साथ नगर के इतवारिया बाजार से शुरु हुई आचार्य श्री जी के चित्र की शोभायात्रा का त्रिमूर्ति मन्दिर में समापन कर विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिसमें ” णमोकार महामंत्र ” का जाप किया गया। इस अवसर पर राणा चितरंजन सिंह, पार्षद प्रदीप सोनी, राकेश जैन मेडिकल, योगेश पांडे, मुकेश चौधरी,आशीष त्यागी, महावीर जैन, संजीव विद्यार्थी, मुकेश साँवला, राकेश बिकुंदिया, अभय जैन सहित समाजजनो ने संबोधित कर विनयांजलि अर्पित की। विनयांजलि सभा का संचालन पंडित मुकेश जैन ने किया।

•• आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज ने संलेखना पूर्वक समाधिमरण :: छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चन्द्रगिरि तीर्थ पर शनिवार देर रात 2 बजकर 35 मिनट पर दिगम्बर जैन मुनि परंपरा के आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज ने संलेखना पूर्वक समाधिमरण कर लिया है। उन्होंने आचार्य पद का त्याग करने के बाद तीन दिन का उपवास व मौन धारण करने के बाद शनिवार को अपना शरीर त्याग दिया। रविवार को दोपहर 1 बजे चन्द्रगिरि तीर्थ पर उनका डोल निकालकर पंचतत्व में विलीन किया गया। इसी के साथ उनकी संतत्व से सिद्धत्व की यात्रा का समापन हुआ। 

•• राजनेताओं ने भी सोशल मीडिया अकाउंट से दी श्रद्धाजंलि :: आचार्य श्री के समाधिमरण की सूचना मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सहित देश के राजनेताओं ने अपने सोशल मीडिया व अपने X अकाउंट पर शोक संदेश से श्रद्धांजलि अर्पित की है। 

•• मुनि समय सागर जी को मिला आचार्य पद :: पूर्ण जागृतावस्था में आचार्य श्री ने अपने आचार्य पद का त्याग करते हुए 3 दिन के उपवास गृहण करते हुए आहार एवं संघ का प्रत्याख्यान कर प्रायश्चित देना बंद कर दिया था। 6 फरवरी मंगलवार को दोपहर निर्यापक श्रमण मुनिश्री योग सागर जी से चर्चा करते हुए संघ संबंधी कार्यों से निवृत्ति ले ली और उसी दिन आचार्य पद का त्याग कर दिया था। उन्होंने आचार्य पद के लिए प्रथम मुनि शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री समयसागर जी महाराज को योग्य समझा और उन्हें आचार्य पद दिए जाने की घोषणा कर दी। 

•• आचार्य श्री सम्पूर्ण भारत के अपराजेय साधक ::  ब्राह्मण के देवता की उपाधि से अलंकृत आचार्य श्री विद्या सागर जी अपराजेय साधक थे। उन्होंने सम्पूर्ण संत जीवन में वर्द्धमान जैसी निर्दोष मुनि चर्या का पालन कर उत्कृष्टता को प्राप्त किया है। जो कि आमजन के लिए प्रेरणादायक है। स्वयं के आत्म कल्याण के साथ ही हाथ करघा, गोसेवा, शिक्षण एवं स्वास्थ्य संस्थानो जैसे मानव व प्राणिमात्र के कल्याण के कई प्रकल्प का संचालन उनकी प्रेरणा से होता है। इंडिया को भारत व हिंदी हमारी भाषा हो जैसे के कई स्वप्न आचार्य श्री के थे जो आज साकार हुए है। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!