राष्ट्रहित में हो पत्रकारिता , श्री प्रकाश त्रिवेदी 📣 श्री त्रिवेदी बोले – “समस्या नहीं, समाधान बने पत्रकारिता – श्री त्रिवेदी का दृष्टिकोण”

📌 नारद जयंती पर पत्रकारिता के पुनर्जागरण की आवश्यकता पर हुआ आत्ममंथन
जनमत जागरण @ आगर-मालवा।
नारद जयंती के अवसर पर बुधवार को मधुबन गार्डन में विश्व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी में samacharline.com के संपादक, वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रकाश त्रिवेदी (उज्जैन) ने पत्रकारिता की आत्मा को टटोलने वाला गहन विचारमंथन प्रस्तुत किया।
विषय था – “राष्ट्रहित के विमर्श में पत्रकारिता का योगदान”, जिसे उन्होंने ऐतिहासिक विमर्श में परिवर्तित कर दिया।
चारों तहसीलों से पहुंचे पत्रकारों की उपस्थिति में श्री त्रिवेदी ने स्पष्ट कहा –
✍️ “भीड़ नहीं, विवेकशील पत्रकारों की ज़रूरत है – नारद जी जैसे, जो देव और दानव दोनों के बीच संवाद का धर्म निभाते थे।”
📰 पत्रकारिता: व्यवसाय नहीं, विचारधारा की साधना
श्री त्रिवेदी ने कहा –
“आज पत्रकार ‘चपेट से बने पत्रकार’ हो रहे हैं – न साधना है, न दृष्टि।”
उनका संदेश था कि पत्रकार को सत्ता का नहीं, समाज का प्रतिनिधि बनना चाहिए।
✍️ “पत्रकारिता केवल समस्या उजागर करने का कार्य नहीं, समाधान की ओर समाज को दिशा देने का माध्यम है।”

📢 राष्ट्र की चेतना और पत्रकार की भूमिका
वक्ता ने राष्ट्र को केवल भूखंड नहीं, जीवंत चेतना बताया और पत्रकार को उसका प्रहरी।
उन्होंने कहा –
✍️ “संवाद का उद्देश्य सुधार होना चाहिए, न कि प्रतिशोध।”
पत्रकारिता को चाहिए कि वह कॉर्पोरेट प्रभाव से मुक्त होकर समाजोन्मुख इकोसिस्टम का निर्माण करे।
⚠️ खोजी पत्रकारिता की कमी और समाज से संवाद का टूटना
उन्होंने चिंता जताई –
📰 “कॉपी-पेस्ट की संस्कृति ने पत्रकारों की जिज्ञासा छीन ली है। मीडिया अब मौनदर्शक बनता जा रहा है।”
पत्रकारों को केवल सूचना नहीं, उत्तरदायित्व की माँग करनी होगी।
📲 डिजिटल मीडिया: अवसर भी, चुनौती भी
डिजिटल पोर्टल आज अधिक पढ़े जा रहे हैं, लेकिन समाज की भागीदारी घट रही है।
✍️ “पत्रकारिता को मानसिक रूप से युद्ध जैसी परिस्थितियों के लिए भी तैयार रहना चाहिए।”
षड्यंत्रों से सावधान रहकर सत्य की ओर खड़ा होना ही सच्ची पत्रकारिता है।
✨ जीवित पत्रकारिता से ही जीवंत राष्ट्र
सार स्पष्ट था –
📰 “पत्रकारिता केवल उपकरणों से नहीं, चिंतन से चलती है। विषय-वस्तु की कमी सबसे बड़ी चुनौती है।”
प्रेस की स्वतंत्रता अधिकार नहीं, उत्तरदायित्व भी है – जिसे चरित्र से निभाना होगा।

🎙️ पत्रकार बना समाज का दिशा-दर्शक
उन्होंने कहा –
✍️ “पत्रकारिता कोई पाठ्यक्रम नहीं, उपजी हुई समझ है।”
उन्होंने केरल और राजकोट मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा –
“क्या हम अपने जिले में ऐसा प्रयास नहीं कर सकते?”
✅ कार्यक्रम की गरिमा और संरचना
- अध्यक्षता: सेवानिवृत्त प्राचार्य नंदकिशोर कारपेंटर
- दीप प्रज्वलन व नारद जी के चित्र पर माल्यार्पण से शुभारंभ
- संचालन: पत्रकार राजेश अजनबी
- अतिथि परिचय: पत्रकार राजेश कुमरावत ‘सार्थक’
- आभार प्रदर्शन: पत्रकार राकेश बिकुंदिया

अंततः श्री त्रिवेदी का सार्थक संदेश:
📣 “जब तक पत्रकारिता जीवित है, राष्ट्र जीवंत है।
विचारधारा की चिंता करेंगे, तभी संस्कृति बचेगी।”



