अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणआगर मालवादेशमध्यप्रदेश

दुष्टों के लिए देश की बिटिया को अपनी रक्षा के लिए खुद को ही आगे आना होगा,क्योंकि द्रोपदी की लाज बचाने के लिए जिस प्रकार कन्हैया आएं थे, अब वे नहीं आएंगे..?

🚩 राखी के साथ अपनी रक्षा के साधन भी साथ रखे बहिन बेटियां - स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। आज अंतराष्ट्रीय वेदलक्षणा संस्कृत दिवस है। संस्कृत जिसने हमारी संस्कृति को किसी समय विश्व स्तरीय बनाया था। संस्कृत एक भाषा नही अपितु एक वरदान है। काल के प्रवाह से हम लोगो को हमारी संस्कृति से प्रेम कम हो गया है इस कारण से संस्कृत का भारत भूमि पर लोप सा हो रहा है। संस्कृत के प्रति प्रेम समाप्त हो रहा है। जब की विज्ञान ने भी यह साबित कर दिया की संस्कृत एक ऐसी वैज्ञानिक भाषा है जिसका कंप्यूटर पर बहुत अच्छा उपयोग है। गणनाओं के विषय पर संस्कृत सर्वश्रेष्ठ है। समय की आवश्यकता को मध्य नजर रखते हुए अपने बच्चो को संस्कृत भाषा का ज्ञान कराए। जिससे हमारी संस्कृति को श्रेष्ठ स्थान पर पुनः स्थापित किया जा सके।

🚩 स्वामीजी ने आगे बताया कि आज रक्षाबंधन उत्सव भी है । उत्सव को उत्साह से  नही मनाएं तो वह उत्सव उत्सव नहीं रहता है   । कही कही तो विकृत मानसिकता के लोगों  के कारण हमारी संस्कृति और हमारी परंपराएं कमजोर हुई है और उसका प्रभाव भारत वर्ष में देखा जा रहा है। हमारे समाज में व्याप्त विकृत मानसिकता के चलते सावन के इस पवित्र माह में कोलकाता के  RG मेडिकल कॉलेज की  PG की पढ़ाई कर रही  एक बिटिया को कुछ दुष्ट लोगों ने  दुराचार करके हत्या कर दी  है, ऐसे दुष्टों के लिए देश की बिटिया को अपनी रक्षा के लिए खुद को ही आगे आना होगा ,  क्योंकि देवी द्रोपदी की लाज बचाने के लिए जिस प्रकार कन्हैया आएं थे अब वे नहीं आएंगे और अब हमें अपने भीतर भगवान को प्रगट करने की आवश्यकता है और इसके लिए श्रेष्ठ माध्यम है भगवती गोमाता क्योंकि उसकी सेवा से सतोगुण बढ़ेगा और सतोगुण बढ़ेगा तो ईश्वर स्वत: अपने ह्रदय रूपी मंदिर में विराजमान हो जाएंगे क्योंकि  गोसेवा का अभाव होने से  समाज में सतोगुण का अभाव हुआ है और रजोगुण और तमो गुणो बढ़ने के कारण लोगों में क्रोध बढ़ा है जिसके कारण  ही कोलकाता जैसी घटनाओं को बल मिलता है । महाराज जी ने देशी की सभी बेटियों से रक्षा बंधन के पर्व पर आह्वान किया कि  वर्तमान में जैसी परिस्तिथियां देश में चल रही है उन परिस्थितियों के लिए बहिन बेटियों को अपनी रक्षा के लिए राखी के साथ अपने अपनी रक्षा के साधन को रखने की आवश्यकता है । कथा में आरती से पूर्व कथा अभयारण्य  में विराजित सभी गोमाताओ को वैदिक राखी एवं लड्डू का भोग लगाकर रक्षाबंधन पर्व मनाया और अंत में सभी श्रद्धालुओं ने अभयारण्य में विराजित सभी सन्त साध्वियों का तुलादान करवाया । 

अतिथि :: 133 वे दिवस पर अतिथि के रूप में राजस्थान के रामगंज मण्डी से प्रह्लाद जी राठौर एवं मध्यप्रदेश के सोयत कलां से अमर सिंह जी विश्वकर्मा उपस्थित रहें । श्रावण शुक्ला पूर्णिमा रक्षाबंधन के पुण्य पर्व पर शिवसहस्त्राहुति यज्ञ ,पार्थिव शिव लिंग पूजन एवं रुद्राभिषेक श्री बंशीधर जी राठी चेन्नई (तमिलनाडु) के परिवार ने विप्रजनों के माध्यम से सम्पन्न करवाया।

133 वे दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र की बहिनों की ओर से :::  एक वर्षीय गोकृपा कथा के 133 वें दिवस पर    चुनरी यात्रा राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र से मेवाड़ की बहिनें श्रीमती सुशीला देवी तेली((राजनगर), श्रीमति ललिता देवी तेली (सनवाड), श्रीमती गायत्री देव तेली (नाथद्वारा), श्रीमती तारादेवी तेली(राज्यावास), श्रीमती मीना देवी तेली (भादरण गुजरात) एवं पूनम देवी तेली (कानोड़) आदि बहिनों ने अपने  देश,राज्य एवं ग्राम/नगर के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन  करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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