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सावन विशेष: जानिए साठ वर्ष पूर्व दस श्रद्धालुओं ने कैसे निकाल नगर में नीलकंठेश्वर व ओंकारेश्वर महादेव की शाही सवारी

🚩 10 लोगो से शूरु हुआ शाही सवारी का सिलसिला अब हजारों की तादाद में शामिल होते है श्रद्धालु 🚩 भादौ के पहले सोमवार पर 26 अगस्त को पूरे लाव लश्कर के साथ निकलेगी शाही सवारी

 जनमत जागरण @ सुसनेर से दीपक जैन की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट :: आज से करीब 60 साल पूर्व महज 10 लोगो के साथ नगर में भादौ के पहले सोमवार को निकलने वाली नगराधिपति बाबा नीलकंठेश्वर महादेव व ओंकारेश्वर महादेव की शाही सवारी की शुरुआत हुई। समय के साथ सवारी की भव्यता बढ़ती गई। अब इस सवारी में लगभग 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का कारवा शामिल होता है। इस शाही सवारी की शुरुआत नगर के कुछ लोगो द्वारा एक लकड़ी की बनी छोटी पालकी में की गई थी। जो दो चार ढोल और मशालों के साथ निकाली जाती थी। कुछ समय बाद नीलकंठेश्वर महादेव के मुखोटे को हाथ ठेले में विराजित कर निकालना शुरू किया गया जो अब उज्जैन महाँकाल की तर्ज पर पूरे शाही ठाट बाट से निकलती है। जो वर्ष 1990 से शिवभक्त मण्डल के तत्वावधान में प्रतिवर्ष भादौ मास के पहले सोमवार को निकाली जाती आ रही है। इस बार यह सवारी 61 वी सवारी के रूप में सोमवार 26 अगस्त को निकाली जाएगी। इस अवसर पर सोमवार को सुबह साढ़े 5 बजे नीलकंठेश्वर महादेव के महारुद्राभिषेक के साथ शाही सवारी की शुरुआत होगी। उसके बाद श्रृंगार आरती, साढ़े 11 बजे महादेव के मुखोटे की पूजन अर्चन कर पालकी में विराजित किया जएगा, साढ़े 12 बजे चौसठ माता मन्दिर में महाआरती कर शाही सवारी बैंड बाजो, ढोल ताशे, अखाड़े, भूतों की बारात व आकर्षक झांकियों के साथ शाही ठाट बाट से शुरू होगी। जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए रात 8 बजे वापस मेला ग्राउंड स्थित नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर पहुँचेगी। जहाँ महाआरती कर महाप्रसादी वितरित की जाएगी। इस दौरान नगरवासियों द्वारा जगह-जगह महादेव का पूजन अर्चन कर पुष्प वर्षा व स्वल्पाहार से सवारी का स्वागत भी किया जाएगा। आयोजन को लेकर पूरे नगर को बेनर पोस्टर व तोरण द्वार से दुल्हन की तरह सजाया जाएगा।

फाइल चित्र – सालों पहले हाथ ठेले पर इस तरह निकलती थी सवारी।

🚩 एक बुजुर्ग के ताने से मिली थी प्रेरणा  :: शिव भक्त मण्डल के दुर्गेश शर्मा सहित अन्य सदस्यों के अनुसार उस समय जब नगर में शाही सवारी निकलती थी तो सवारी के चल समारोह में गिनती के 15-20 लोग ही शामिल होते थे। चलसमारोह में श्रद्धालुओं की कम संख्या व अरुचि को भगवान नीलकंठेश्वर का अपमान मानते हुए नगर के एक बुजुर्ग ने इन युवाओं को ताना देकर सवारी नही निकालने का कह दिया था। बुजुर्ग के इस ताने ने युवाओं में ऊर्जा भरने का काम किया और उसके बाद से ही शाही सवारी का स्वरूप पूरी तरह बदल गया। सवारी बैंड बाजो, ढोल ढमाकों, आकर्षक झांकियों व लाव लश्कर के साथ शाही अंदाज में निकलना शूरु हो गई। जो आज भी अनवरत जारी है। 

🚩चंपा के मंदिर में होगा हरि-हर मिलन ::  महादेव की शाही सवारी के दौरान प्रतिवर्षानुसार  संध्या के समय नगर के शुक्रवारिया बाजार स्थित श्री गणपति लक्ष्मी नारायण चंपा के मंदिर में हरि-हर मिलन होगा। पंडित गौरवराज शर्मा ने बताया कि हरि-हर मिलन के दौरान शाही सवारी की पालकी में विराजित हर स्वरूप महादेव व चंपा के मंदिर में विराजित हरि स्वरूप भगवान नारायण का मिलन करवाकर महाआरती कर प्रसादी का वितरण होगा।   

चित्र – अंतिम सोमवार पर नीलकंठेश्वर महादेव के श्रृंगार का।

🚩अंतिम सोमवार पर किया महादेव का आकर्षक श्रृंगार :: सावन के अंतिम सोमवार पर नगर के शिवालयों में महादेव का आकर्षक श्रृंगार कर महाआरती की गई। श्रृंगार दर्शन के लिए बड़ी सँख्या में श्रद्धालु शिवालयों में पहुँचे। नगर के शिव का बाग स्थित नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में महादेव का दूल्हे राजा के रूप में श्रृंगार किया गया। इसके अतिरिक्त ओंकारेश्वर महादेव, पुरानी तहसील के विश्वेश्वर महादेव सहित अन्य शिव मन्दिरो में भी आकर्षक श्रृंगार किया गया। सिंचाई विभाग स्थित श्री मनकामनेश्वर महादेव मंदिर में शिव रूप में श्रृंगार कर महाआरती कर प्रसादी वितरण किया गया। साथ ही महादेव को राखी समर्पित कर रक्षा बन्धन पर्व भी मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। 

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