भीतर और बाहर की उन्नति भगवती गोमाता ही कर सकती है – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। इस संसार में पुण्य कार्य किसी किसी से ही होता है और जब पुण्य बढ़ता है तो प्रकृति के साथ हमारा सम्पर्क भी प्रगाढ़ होता चला जाता है, जैसे चन्द्रमा हमारी पृथ्वी का एक उपग्रह माना जाता है और हम बचपन से ही चन्द्रमा को मामा कहते आए है। आज ही के दिन भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने चंद्रयान 3 की उड़ान भरी थी और उसी उपलक्ष में आज पूरा विश्व अन्तरिक्ष दिवस मना रहा है। अन्तरिक्ष जिससे हमारा प्राचीनकाल से सम्बन्ध रहा है नारद जी से लेकर अनेक ऋषि,तपस्वियों का अंतरिक्ष में विचरण इस बात को इंगित करता है कि हमारा अंतरिक्ष विज्ञान बहुत समृद्ध हुआ करता था। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 137 वे दिवस पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही।
🚩 स्वामीजी ने आगे बताया कि अंतरिक्ष का एक अर्थ अन्त: यानि हम जितना बाहर उन्नति कर रहें है उतनी उन्नति भीतर से भी करनी चाहिए ।अगर दोनों उन्नति समान हुई तो इस लोक और उस लोक दोनों में आनन्द होगा और ऐसा नहीं हुआ तो एक पक्ष रहने से जीवन में वह आनन्द नहीं आएगा,जिस आनन्द को हम लोग चाहते है,उस आनन्द को लेने के लिए हमें भीतर और बाहर सम होना पड़ेगा और भीतर और बाहर से सम करने का काम भगवती गोमाता करती है अर्थात बुद्धि देकर बाहर की उन्नति एवं विवेक देकर भीतर की उन्नति करती है गोमाता यानि शरीर को स्वस्थ रखकर बाहर की उन्नति तो मन को पावन करके मन को पवित्र करके अन्दर की उन्नति भी करवाती है ।
भीतर और बाहर की उन्नति समान भाव से हो इसका उपाय विश्व में केवल केवल गोमाता ही है और कोई नही कर सकता ।
🚩गोमाता की चमड़ी में वह गुण जिससे वह जहर को अपने अंदर ही अवशोषित कर लेती है :: स्वामीजी ने बताया कि गोमाता और भगवान महादेव दोनो का कार्य एक ही है। बाबा जगत के विष को खत्म करते है इसलिए दुनिया उनको नीलकंठ कहती है। जब समुंद्र मंथन के समय उत्पन्न जहर को बाबा ने ही पिया और नीलकंठ कहलाए। अब जब कंद मूल फल में, सब्जियों में, अनाज में, भोजन में जो जहर पैदा हो रहा है उसे गोमाता ही खत्म कर सकती है। गोमय और गोमूत्र विष को क्षीण कर देते है। गोमाता अगर जहर को खा भी ले तो वह अपने शरीर में पचा लेती है। कुछ लोगो ने एक प्रयोग किया। प्रयोग के तहत चारे में हल्के जहर को छिड़का और वह चारा गोमाता, भैंस, जर्सी तीनो को खिलाया। उसके पश्चात तीनों के दूध को लैब में चेक कराया। परिणाम स्वरूप भैस और जर्सी के दूध में उस जहर की मात्रा पाई गई लेकिन गोमाता के दूध में वह जहर नही मिला। गोमाता की चमड़ी में वह गुण जिससे वह जहर को अपने अंदर ही अवशोषित कर लेती है ओर अमृत जैसा दूध हमे प्रदान करती है।

⏩ आगामी कार्यक्रम श्री वृंदावन धाम के सुप्रसिद्ध रासलीला :: कृष्ण जन्माष्टमी महामहोत्सव के उपलक्ष में आगामी 25, 26एवं 27 अगस्त को सांयकाल 07 बजे से गो अभयारण्य मालवा में श्रीधाम वृन्दावन की सुप्रसिद्ध ” श्री हित आदर्श कृष्ण कला रासलीला मंडल” के माध्यम से रासलीला प्रस्तुति स्वामी देवेंद्र वशिष्ठ जी के द्वारा होगी
⏩ अतिथि: भाद्रपद कृष्णा चतुर्थी पर शिवसहस्त्राहुति यज्ञ, पार्थिव शिव लिंग पूजन एवं रुद्राभिषेक श्री सुगन चन्द जी गट्टानी के सुपोत्र एवं माल चन्द जी गट्टानी के सुपुत्र श्याम सुन्दर जी एवं धर्मपत्नी श्रीमति रीना जी गट्टानी सूरत हाल मुकाम शिव सागर आसाम ने सम्पन्न करवाया

⏩137 वे दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के झालावड़ जिले से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 137 वें दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के झालावाड़ जिले की रायपुर तहसील के पगारिया ग्राम के घनश्याम वैरागी,एवं रामभरोस व महिला मण्डल की रामकुंवर बाई, शान्ति बाई,नंद बाई,, लाड कुँवर, प्रकाश कुंवर के साथ सेंकड़ों मातृ शक्ति अपने परिवार देश, राज्य एवं ग्राम के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



