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संतो की भावना की कद्र की जाएं यहीं संतो के लिए श्रेष्ठ सम्मान है- स्वामी गोपालानंद सरस्वती


जनमत जागरण @ सुसनेर। आज सिक्खों के आदिगुरु गुरु नानक देवजी का निर्वाण दिवस है नानक देवजी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा 1469 और निर्वाण 22 सितंबर 1539 को हुआ़ है । सिखों के प्रथम (आदि ) गुरु हैं, इनके अनुयायी इन्हें नानक, नानक देव जी, बाबा नानक और नानक शाह नामों से सम्बोधित करते हैं। नानक अपने व्यक्तित्व में दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्मसुधारक, समाजसुधारक, कवि, देशभक्त और विश्वबन्धु – सभी के गुण समेटे हुए थे। इनका जन्म स्थान गुरुद्वारा ननकाना साहिब पाकिस्तान में और समाधि स्थल करतारपुर साहिब पाकिस्तान में स्थित है। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 167 वे दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही।


🚩 पूज्य महाराज जी ने बताया कि मालवा सहित सम्पूर्ण भारत में गोसेवा की अलख जगाकर प्रत्येक गोसेवक के दिलों में बसने वाले पूज्य संत पण्डित श्री कमल किशोरजी नागर को पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित करने का भारत सरकार की ओर से जो प्रस्ताव आया था,उसे पूज्य नागर जी ने गोमाता को समर्पित करने की खबर मिलते ही पूज्य महाराज जी ने बताया कि संतो का सम्मान संतो की भावना की कद्र की जाएं यहीं संतो का श्रेष्ठ सम्मान है और पूज्य नागर साहब के लिए तो उनके शिष्यों एवं भारत एवं राज्यों की सरकारों के माध्यम से गो हित में श्रेष्ठ कार्य किया जाएं यही उनके लिए श्रेष्ठ एवं उत्तम सम्मान होगा कि भगवान राम कृष्ण की धरती भारत में वेदलक्षणा गोमाता की हत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगे अर्थात गोमाता का खून इस पुण्यधरा में नहीं बहे ,यही पूज्य पण्डित कमल किशोर जी नागर के लिए भारत सरकार की और से श्रेष्ठ सम्मान होगा। क्योंकि उनके व्यक्तित्व के सामने पद्मश्री अवार्ड तो सूरज को दीपक दिखाने जैसा है ।
🚩 पूज्य स्वामीजी ने श्राद्ध पक्ष के पंचम दिवस पर श्रोताओं को बताया कि श्राद्ध मनुष्य का कर्म है और इसको करने का विधान भी है और आज के समय में श्राद्ध का सबसे श्रेष्ठ कर्म यह है कि मनुष्य मनुष्य बना रहें क्योंकि इस कालिकाल में जैसे जैसे मानव गोसेवा से दूर हुआ है तबसे वह राक्षक वृति के कर्म करने लग गया है,इसलिए मनुष्य को मनुष्य बनना है तो उसे निष्काम भाव से पुनः गोसेवा को अपनाना होगा ।


🚩 स्वामीजी ने बताया कि मेहनत का फल मीठा होता है और आप मेहनत करेंगे तो आप द्वारा की गई मेहनत से आपके पितृ भी प्रसन्न होंगे क्योंकि कृपा एवं मेहनत दोनो का संगम है और इसलिए दोनों का संतुलन बना रहेगा तो उससे आपके पितृदेव भी प्रसन्न रहेंगे अर्थात किसी पिता का पुत्र जब कोई मेहनत नहीं करें ओर वह निठल्ला बैठा रहता है तो उसके पिता का मन बहुत दुःखी होता है ,उसी प्रकार पितृदेव की सन्तान कुछ कर्म न करें तो उन्हें कष्ट होता है इसलिए पितृदेव को प्रसन्न करने का सबसे श्रेष्ठ तरीका मेहनत ही है और धन प्राप्ति में मेहनत के साथ पितृदेव की कृपा भी चाहिए ।

अतिथि:: 167 वें दिवस पर गोलोकवासी पूज्य अविराम दास जी महाराज के गादीपति पूज्य स्वामी प्रद्युम्नदास जी महाराज हरिद्वार का आशीर्वाद मिला व अतिथि के रूप में श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा लोक पुण्यार्थ न्यास के मुख्य गो चिकित्सक एवं गो संवर्धन सलाहकार डॉक्टर हितेष पुरोहित,गो चिकित्सा अधिकारी पिडावा डॉक्टर अर्जुन शर्मा एवं सुसनेर थाना प्रभारी सुश्री केसर राजपूत, मंजूर आलम खान उप निरीक्षक , हेडकांस्टेबल उपेन्द्र सिंह गुर्जर एवं रामसेवक मीणा उपस्थित रहें ।

 167 वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश एवं गुजरात से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 167 वें दिवस पर गुजरात के कर्णावती से श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा ने न्यासी अशोक गर्ग,मुकेश गर्ग एवं राजकुमार अग्रवाल व मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से माधव किशोर चतुर्वेदी सेवा निवृत्त पुलिस उपाधीक्षक एवं राजगढ़ जिले की खिलचीपुर तहसील के गांव देवरी से पटेल जसवंत सिंह ,पटेल औंकार सिंह,भगवान सिंह, इंदर सिंह,अर्जुन सिंह एवं राजेन्द्र सिंह एवं जीरापुर तहसील के ग्राम देवरी से महिला मण्डल सहित सैंकड़ों मातृशक्ति व युवाओं ने अपने देश, राज्य एवं ग्राम, नगर के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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