सोलह श्राद्धपक्ष विशेष: पितरों को अपनी मनमर्जी का भोग नहीं लगाना चाहिए , पितरों को कौन सा भोग लगाना चाहिए..? जानिए स्वामी जी ने गोकथा में क्या कहा ..!

🚩मनुष्य एक और तो शमशान में जाने के बाद तुरन्त स्नान करता है वही दूसरी और वह जिन्दे जानवर को खाकर अपने शरीर को मुर्दाघर बना लेता है- स्वामी गोपालानंद सरस्वती
जनमत जागरण @ सुसनेर। आज राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' का जन्म दिवस है वे हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे। वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं। राष्ट्रवाद अथवा राष्ट्रीयता को इनके काव्य की मूल-भूमि मानते हुए इन्हे 'युग-चारण' व 'काल के चारण' की संज्ञा दी गई । प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी 22 मई, 2015 को नई दिल्ली में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' के कार्यों की स्वर्ण जयंती समारोह में 'दिनकर' स्वतन्त्रता पूर्व एक विद्रोही कवि के रूप में स्थापित हुए और स्वतन्त्रता के बाद 'राष्ट्रकवि' के नाम से जाने गये। वे छायावादोत्तर कवियों की पहली पीढ़ी के कवि थे। एक ओर उनकी कविताओं में ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति की पुकार है तो दूसरी ओर कोमल शृंगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति है। इन्हीं दो प्रवृत्तियों का चरम उत्कर्ष हमें उनकी कुरुक्षेत्र और उर्वशी नामक कृतियों में मिलता है। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 168 वे दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही।
🚩 स्वामीजी ने पितृदोष की व्याख्या करते हुए बताया कि पित्रों को अपनी मर्जी का भोग नहीं लगाना चाहिए बल्कि जो पित्रो को अच्छा लगता है उसका ही भोग लगाना चाहिए और पित्रों को भोग लगाने के लिए गोमाता का दूध बहुत पवित्र है और इस सात्विक आहार को पितृ लेकर प्रसन्न हो जाते है।
🚩स्वामीजी ने आगे बताया कि बहुत से लोग पित्रों के भोग के नाम से मासूम पशुओं की पशु बलि चढ़ाते है जो शास्त्रोक्त नही है क्योंकि किसी भी मानव को अधिकार नहीं है कि वह अन्य जीव को हानि पहुंचा सकें साथ ही मनुष्य एक और तो जब किसी की मृत्यु हो जाएं तो शमशानघाट से आने के बाद तुरन्त स्नान करता है वही दूसरी और वह जीवों को मारकर उन्हें पेट में पचा लेता है और अपने शरीर को मुर्दा घर बना लेता है आखिर में मानव की यह कैसी मानवता है। जो भोजन मनुष्य के लिए उत्तम नहीं है उस भोजन को अपने आराध्य देवी देवताओं एवं पितरों को लगाना उचित है क्या यह भी एक विचारणीय विषय है।

⏩ 168 वें दिवस पर गोलोकवासी पूज्य अविराम दास जी महाराज के गादीपति पूज्य स्वामी प्रद्युम्नदास जी महाराज हरिद्वार का आशीर्वाद मिला

⏩ 168 वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश आगर जिले के सोयत कलां से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 168वें दिवस पर आगर मालवा जिले के सोयतकलां नारायण सिंह कुंभकार के साथ सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के प्राचार्य ब्रजमोहन सोनी, पारी प्रमुख बालचंद दांगी,अमित नागर,सोनू कुशवाह, सांवलिया पाटीदार, कुन्दन कुशवाह, राजेश शर्मा(मंत्री) , पुष्पेंद्र पायल सहित विद्यालय परिवार के समस्त अचार्य एवं विद्यार्थियों ने अपने देश, राज्य एवं ग्राम, नगर के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



