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गोशाला संचालक एवं गोपालक अपने गोवंश को लंपी से बचाए – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। आज श्रीमती भीखाजी जी रूस्तम कामा (मैडम कामा) का जन्मदिन है । मैडम कामा भारतीय मूल की पारसी नागरिक थीं जिन्होने लन्दन, जर्मनी तथा अमेरिका का भ्रमण कर भारत की स्वतंत्रता के पक्ष में माहौल बनाया। वे जर्मनी के स्टटगार्ट नगर में 22 अगस्त 1907 में हुई सातवीं अंतर्राष्ट्रीय सोशलिस्ट कांग्रेस में भारत का प्रथम तिरंगा राष्ट्रध्वज फहराने के लिए सुविख्यात हैं। उस समय तिरंगा वैसा नहीं था जैसा आज है। स्वामीजी ने बताया कि जिनको स्वर्ग में देवताओं के साथ आनन्द करना है वे गो दुग्ध से पित्रों को भोग लगाएं और जिनको राक्षसों के साथ रहना है वे भैंस या बकरी के दूध से पित्रों को भोग लगाएं और पितृ पक्ष के 16 दिन अपनी मनमानी नहीं करके श्राद्ध करना चाहिए ताकि सम्पूर्ण वर्ष पितृ तृप्त रहें । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 169 वे दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही।


🚩 स्वामीजी ने आगे बताया कि यह संसार सधने वाला नहीं है, इसलिए भगवान के नाम का आसरा लीजिए ।
बैल धर्म का स्वरूप है,इसलिए उसे कष्ट नहीं देना चाहिए और जो व्यक्ति गोमाता व उसके वंश को सताता है अथवा मारता है या घर से सड़क पर भटकने को छोड़ देता है उस व्यक्ति के पितृ कभी तृप्त नहीं होते है और इस प्रकार के व्यक्ति के कर्म को देखकर उसके पित्रों के मुख से उष्ण स्वास निकलती है जिसके कारण वह व्यक्ति हमेशा किसी न किसी दुःख से पीड़ित रहता है।
स्वामीजी ने सभी गोशाला संचालकों एवं गोपालकों को चेताया कि मध्यप्रदेश की सीमा से लगे राजस्थान के झालावाड़ जिले में पुनः लंपि रोग के लक्षण सामने आएं है,इसलिए गोशालाओं को संचालित करने वालों एवं गोपालकों से पूज्य महाराज जी ने सावधानी बरतने को कहां है और कोई गोवंश संकर्मित हो तो उसे अलग से कोरोंटाइन करके उसका उपचार करें साथ ही बाकि गोवंश को समय समय पर टीकाकरण एवं आयुर्वेदिक ओषधि देना चाहिए।

⏩ 169 दिवस पर चेतन शाह एवं मीनाजी शाह अमलनेर महाराष्ट्र अतिथि उपस्थित रहें ।

169 वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश आगर जिले की सुसनेर तहसील से  : एक वर्षीय गोकृपा कथा के 168वें दिवस पर आगर मालवा जिले के सुसनेर तहसील के कंटालिया का खेड़ा से अमित,राधेश्याम,सोनू एवं रतनलाल राठौर ने अपने देश, राज्य एवं ग्राम, नगर के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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