भारत से गो हत्या का कलंक हटे उसके लिए सम्पूर्ण भारत में नारी शक्ति को जागृत करेगी गोपाल परिवार की साध्वी बहिनें- स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। भारत की पहली महिला चिकित्सक रुक्मा बाई राऊत का जन्म 1864 में आज ही के दिन मुंबई में हुआ था। ब्रिटिश उपनिवेश के दौरान भारत में जब महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर भी जागरूक नहीं थीं तब उन्होंने डॉक्टरी के पेशे में प्रवेश कर एक मिसाल कायम की। 1894 में वह भारत की पहली महिला डॉक्टर बनीं। रुक्मा देवी के जन्मदिवस पर स्वामी जी ने बताया कि भारत में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगे उसके लिए पूर्व में पुरुष शक्ति ने बहुत प्रयास किया लेकिन उन सभी के प्रयास विफल रहें क्योंकि पुरुष दूसरों से शक्ति प्राप्त करते है, जबकि मातृशक्ति तो साक्षात शक्तिस्वरूपा है और शक्ति उनसे ही प्रगट होती है, इसलिए गोमाता के कष्टों को दूर करने के लिए अब मातृशक्ति को आगे आना होगा और भारत में गो हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगे उसके लिए मातृशक्ति को एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा करने की आवश्यकता है और उसके लिए स्वामीजी ने गोपाल परिवार की चारों साध्वी बहिनों को अग्रणी भूमिका निभाकर भारत की मातृशक्ति को संगठित करके एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा करने की वर्तमान समय की जरूरत बताई क्योंकि जब जब भी देश में राष्ट्र हितार्थ कोई भी नई क्रान्ति या कोई नई शुरुआत हुई है तो उसमें सबसे अग्रणी भूमिका नारी शक्ति की ही रही है ,जिसमें झांसी की रानी लक्ष्मी बाई ,राजमाता अहिल्या बाई एवं रुक्मा बाई रावत आदि मातृ शक्ति के उदाहरण हमारे सामने है। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 170 वे दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही ।
🚩 गोरतलब है कि गोपाल परिवार के माध्यम से 31 वर्षीय गो पर्यावरण एवं अध्यात्म चेतना पदयात्रा सम्पूर्ण भारत में चल रही है , जिसमें अनेक साधु सन्यासियो के साथ चार साध्वी बहिने साध्वी कपिला गोपाल सरस्वती,साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती,साध्वी आराधना गोपाल सरस्वती एवं साध्वी निष्ठा गोपाल सरस्वती जिन्होंने उच्चत्तर अध्ययन कर उच्चस्तर का जॉब छोड़कर अपना सारा जीवन गोमाता की रक्षार्थ भारत माता को समर्पित कर दिया है और वे भारत के हर बड़े छोटे नगर, ग्रामीण क्षेत्रों में गो कृपा कथा के माध्यम से गो सेवा की भावना जागृत करने की अलख जगा रही है ।
🚩 पूज्य स्वामीजी ने चारों साध्वी बहिनों के लिए गोबर पीठ से आह्वान किया कि जब आपने अपना जीवन गोमाता की सेवार्थ भारत माता को समर्पित कर ही दिया है तो अब अपना एक लक्ष्य बना लो की आप चारों साध्वी बहिने शक्तिस्वरूपा बनकर शक्ति के पर्व नवरात्रि से सम्पूर्ण भारत की नारीशक्ति को संगठित कर भारत में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगे उसके लिए कमर कस ले और गोमाता की रक्षा के लिए अपने प्राण भी देना पड़े तो भी पीछे नहीं हटना है क्योंकि अगर गोमाता रक्षार्थ अपना बलिदान भी देना पड़े तो इससे श्रेष्ठ कार्य और कोई हो ही नही सकता क्योंकि जिस जिस ने भी जन्म लिया है उसे एक न एक दिन अवश्य जाना ही है और हम जो श्राद्ध कर रहें है वह भी तो उन्हीं का कर रहें है जो हमसे बिछड़कर उपर चले गए है इसलिए हमें श्राद कर्म की आवश्यकता न पड़े अर्थात हमें पुनः पितृयोनि में वापस आना न पड़े उसके लिए अपना जीवन गोमाता हितार्थ जाएं तो इससे बढ़कर और कोई श्रेष्ठ मृत्यु हो ही नही सकती और इस प्रकार गो सेवार्थ अपने बलिदान देने वालों को अन्त में गोलोक धाम ही मिलता है ।
🚩 स्वामीजी ने आज की कथा में बताया कि चार प्रकार के लोग श्राद्ध कर्म कर सकते है जिसमें प्रथम प्रकार है पूर्ण सतोगुण वाला व्यक्ति जो निष्काम भाव से सेवा करता हो और दूसरा व्यक्ति जो सकाम भाव से सेवा करता हो अर्थात जो अपने सुख की कामना के साथ दूसरो के दुखों की चिन्ता करता है यानि मैं भी सुखी रहूं और मेरा पड़ोसी भी सुखी रहें इस प्रकार का व्यक्ति भी श्राद्ध करने में प्रथम श्रेणी के बाद दूसरी श्रेणी में अपना स्थान रखता है और इस प्रकार के व्यक्ति अपने जीवन का कुछ समय एवम् आमदनी गोमाता की सेवा में लगाकर अपने जीवन को धन्य बना लेते है ।

⏩ अतिथि:: 170 वें दिवस पर मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के पाटन निवासी भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवा निवृत हुए शिवनारायण सिंह चौहान की अर्धाग्नि श्रीमती आभा चौहान अतिथि के रूप में उपस्थित रही और साध्वी कपिला गोपाल सरस्वती दीदी ने उनका उपरणा पहनाकर गोमाता की छवि देकर आशीर्वाद दिया ।

⏩ 170 वे दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के शेखावाटी से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 170 वें दिवस पर राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र से श्री भैरव नाथ धाम बादेड शेखावाटी ग्रूफ से पूज्य जेठाराम महाराज भैरव उपासक के सानिध्य में जितेन्द्र स्वामी सीकर, मनोज कुमार धायल सीकर,, मेवा लाल बिजारनिया नागौर,, पदमा राम यादव सीकर एवं रामेश्वर लाल खीचड़ सीकर ने अपने देश, राज्य एवं ग्राम, नगर के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



