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दिव्य अलौकिक गोकथा : पॉलिथिन का उपयोग गो तस्करी एवं गोकसी जैसा ही महापाप है – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। सरदार भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 ई० को एक सिख परिवार में बंगा गांव , पश्चिमी पंजाब जो अब पाकिस्तान में है, उनके पिता सरदार किशन सिंह और माता विद्यावती कौर थी। अमृतसर में 13अप्रैल 1919 को हुए जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड ने भगत सिंह की सोच पर गहरा प्रभाव डाला था और वर्ष 1922 में चौरी-चौरा हत्‍याकांड के बाद गाँधी जी ने जब किसानों का साथ नहीं दिया तब भगत सिंह बहुत निराश हुए। उसके बाद उनका अहिंसा से विश्वास कमजोर हो गया और वह इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि सशस्त्र क्रांति ही स्वतंत्रता दिलाने का एक मात्र रास्ता है। उसके बाद वह चन्द्रशेखर आजाद के नेतृत्‍व में गठित हुई गदर दल के हिस्‍सा बन गए। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 173 वे दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही ।

 🚩 काकोरी काण्ड में राम प्रसाद 'बिस्मिल' सहित 04 क्रान्तिकारियों को फाँसी व 16 अन्य को कारावास की सजाओं से भगत सिंह इतने अधिक उद्विग्न हुए कि चन्द्रशेखर आजाद के साथ उनकी पार्टी हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन से जुड़ गए और उसे एक नया नाम दिया हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन। इस संगठन का उद्देश्य सेवा, त्याग और पीड़ा झेल सकने वाले नवयुवक तैयार करना था। भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसम्बर1928 को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज़ अधिकारी जे० पी० सांडर्स को मारा था। इस कार्रवाई में क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद ने उनकी पूरी सहायता की थी। क्रान्तिकारी साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर भगत सिंह ने वर्तमान नई दिल्ली स्थित ब्रिटिश भारत की तत्कालीन सेण्ट्रल एसेम्बली के सभागार संसद भवन में 08 अप्रैल 1929 को अंग्रेज़ सरकार को जगाने के लिये बम और पर्चे फेंके थे। बम फेंकने के बाद वहीं पर दोनों ने अपनी गिरफ्तारी भी दी और 23 वर्ष की आयु 23 मार्च 1931 को वे भारतमाता की रक्षार्थ फांसी के फंदे पर चढ़ गए थे । 

🚩 स्वामीजी ने श्राद्ध पर्व के एकादश पर्व पर श्राद्धकर्म के लिए किस प्रकार के विप्रदेव होना चाहिए उसके बारे में बताया कि जिस प्रकार अनेकों गायों के झुण्ड में एक बछड़ा अपनी मां को ढूंढकर दुग्धपान कर लेता हैं उसी प्रकार वायु में विचरण करने वाले पितृदेव भी गोमाता की सन्निधि में रहने वाले श्रेष्ठ विप्र देव के मुख के म्माद्यम से अपनी सन्तान के द्वारा किए गए श्राद्ध तर्पण कव्य को ग्रहण कर तृप्त हो जाते है क्योंकि गोमाता करूणा की सागर है और उसकी सेवा करने वाले ब्राह्मण परम करूणा के सागर है और ऐसे ब्राह्मण श्राद्ध के श्रेष्ठ पात्र है ।स्वामीजी ने बताया कि हम गो तस्करों एवं कसाइयों को ही गो हत्यारे मानते है लेकिन अपने आप को धर्मात्मा एवं गोभक्त मानने वाले हम लोग भी प्लास्टिक का उपयोग कर गो हत्या जैसे महापाप के भागी बन रहें है ।

🚩 स्वामीजी ने श्राद्ध पक्ष के पुण्यपर्व पर आस्था चैनल के माध्यम से सभी देशवासियों से अपील की है कि आप सभी प्लास्टिक का उपयोग बन्द करने का संकल्प ले साथ ही भारत सहित सभी राज्यों की सरकार से आग्रह किया कि आप सम्पूर्ण भारत सहित अपने अपने राज्यों से प्लास्टिक पर पूर्णरूप से प्रतिबन्ध लगाएं ताकि भारत की पुण्यभूमि में भगवती गोमाता की प्लास्टिक खाने से असमय मृत्यु न हो । श्राद्ध पर्व की एकादशी पर प्लास्टिक उपयोग पर पूर्ण प्रतिबन्ध का संकल्प अपने पित्रों की आत्मशांति एवं उनके कल्याण के लिए श्रेष्ठ कार्य होगा।

अतिथि:: 173 वें दिवस पर पूज्य स्वामी शिवश्याम पुरी महाराज, हरियाणा,अचार्य डॉक्टर गौरी शंकर उपाध्याय देवघर झारखण्ड एवं देवास से रामभरोसे महाराज,तोताराम सिंधे आदि सन्त एवं सुभाष सक्सेना कंट्रीज कॉल न्यूज पेपर जयपुर,स्वामी रामानंद गोशाला उज्जैन से कमल किशोर बांगड,सुनील बांगड, श्यामलता बांगड, श्री मां बिसासन गोशाला सिया (कबूली) नलखेड़ा से गोशाला संचालक कनीराम सरपंच, जगदीश,चेन सिंह,कालू सिंह, श्याम सिंह, मदन सिंह गंगापुर, कालू सिंह यादव लोला खेड़ी आदि अतिथी उपस्थित रहें ।

173 वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के देवास एवं आगर एवं राजस्थान के झालावाड़ जिले  से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 173 वें दिवस पर मध्यप्रदेश के देवास जिले की सोनकच्छ तहसील के जामगोद ग्राम से श्रीमति आभा तिवारी के परिवार की और से आगर जिले के  सुसनेर नगर से राजेन्द्र बंब,कमलेश मोदानी, पुनित मोदानी,एवं आश्रय मोदानी परिवार की और से एवं राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिड़ावा तहसील के सेमली भवानी एवं पिड़ावा नगर की महिला मण्डल ने अपने देश, राज्य एवं ग्राम, नगर  के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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