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“सालरिया के गो अभयारण्य में श्री कामधेनु गुरुकुलम का शुभारंभ | सरस्वती पूजन के साथ हुआ प्रथम प्रवेशोत्सव”

ग्वालों के बच्चों और ग्रामीण बालकों के लिए निशुल्क वैदिक शिक्षा की पहल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संकल्प से साकार हुआ गुरुकुलम


🌼 “जहाँ संदीपनी की ध्वनि में गूंजा था ज्ञान का अनादि नाद…”

मालव की गोभूमि पर पुनर्जीवित हुई गुरुकुल परंपरा, श्री कामधेनु गुरुकुलम में गूंजे वेदघोष

जब-जब सनातन भारत की शिक्षा परंपरा की बात होती है, तब-तब उज्जैन के संदीपनी आश्रम का स्मरण होता है—वही तपोभूमि जहाँ श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने गुरु संदीपनी से वेद, नीति और ब्रह्मविद्या का ज्ञान प्राप्त किया। यह केवल अक्षरों की शिक्षा नहीं थी, यह थी आत्मा को संस्कारित करने वाली दीक्षा।
आज उसी ऋषि परंपरा की गूंज मालव की गोभूमि सालरिया में फिर सुनाई दी, जब श्री कामधेनु गुरुकुलम का प्रथम प्रवेशोत्सव माँ सरस्वती की वंदना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सम्पन्न हुआ।


सरस्वती पूजन के साथ श्री कामधेनु गुरुकुलम में प्रवेशोत्सव

जनमत जागरण @ सुसनेर।
जनपद क्षेत्र में मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा लोक पुण्यार्थ न्यास द्वारा संचालित श्री कामधेनु गुरुकुलम का शुभारंभ माँ करणी माता, कल्पगुरु भगवान दत्तात्रेय एवं गो रक्षक हनुमान जी महाराज की सन्निधि में सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर धर्मरत्न पूज्य बृज बिहारी सरकार अनिकेत कृष्ण जी महाराज (जबलपुर) एवं गोधाम महातीर्थ के प्रबंध न्यासी व गो अभयारण्य निदेशक अम्बालाल सुथार की गरिमामयी उपस्थिति रही।
गुरुकुल की प्रधानाचार्या मधुबाला शर्मा व आचार्यगण हीरालाल यदुवंशी, श्याम जोशी, गोविन्द सिंह चौहान, लखन सिंह के सान्निध्य में पं. श्याम जोशी द्वारा वैदिक मंत्रों के साथ माँ सरस्वती पूजन कर प्रथम प्रवेशोत्सव सम्पन्न किया गया।


शिक्षा के साथ संस्कारों की साधना

यह गुरुकुल गोधाम में गोसेवा कर रहे ग्वालों के बालक-बालिकाओं और आसपास के गरीब, होनहार विद्यार्थियों को निःशुल्क वैदिक शिक्षा देने का उद्देश्य लेकर प्रारंभ किया गया है।

  • कक्षा 1 से 5 तक के लिए अनिवासीय और
  • कक्षा 6 से 8 तक के लिए आवासीय बालकों की गुरुकुल व्यवस्था की गई है।

मध्यप्रदेश शासन की अनुमति से प्रारंभ यह गुरुकुल उन संतानों को समर्पित है जो गौसेवा, ऋषिपरंपरा और सांस्कृतिक पुनरुत्थान में अपना जीवन लगाना चाहते हैं।


मुख्यमंत्री के गोसेवा भाव से जुड़ा स्वप्न साकार

यह वही भूमि है जहाँ 25 मार्च 2025 को गोसेवक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 61वें जन्मदिवस पर ‘गोवंश रक्षा वर्ष’ के अंतर्गत आयोजित वेद-लक्षणा गो आराधना महामहोत्सव में इस गुरुकुल का उद्घाटन किया गया था। अब यह स्वप्न साकार होकर शिक्षा का एक जीवंत केंद्र बन गया है।


🔖 ✍🏻 सार्थक चिंतन:
“गुरुकुल वह दीपशिखा है, जहाँ ज्ञान केवल विषय नहीं, ब्रह्म है। संस्कार केवल शिक्षा नहीं, साधना है। श्री कामधेनु गुरुकुलम एक भारत के पुनर्जागरण की आहट है – जहाँ बालक वेदों के स्वरों में गूंजते हुए भावी भारत के वास्तुकार बनेंगे।”


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