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'सार्थक' दृष्टिकोण365 पर्व – 365 प्रेरणाएँआस्थामंदसौरमध्यप्रदेशस्पेशल रिपोर्ट

भानपुरा में केशुबावजी महाराज का भव्य विवाह महोत्सव, शोभायात्रा का पुष्पवर्षा से स्वागत

पांच दिवसीय विवाह महोत्सव के समापन अवसर पर निकली भव्य शोभायात्रा, सामाजिक सद्भाव के साथ मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान

शरद पूर्णिमा पर भानपुरा में उमड़ा आस्था का सैलाब, केशुबावजी महाराज की शोभायात्रा का जगह-जगह पुष्पवर्षा से स्वागत

पांच दिवसीय विवाह महोत्सव के समापन अवसर पर निकली भव्य शोभायात्रा, सामाजिक सद्भाव के साथ मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान

जनमत जागरण @ संवाददाता, भानपुरा (मंदसौर)।

भारतीय संस्कृति में पर्व केवल उत्सव मनाने के अवसर नहीं, बल्कि पीढ़ियों से प्रवाहित आस्था, परंपरा, प्रकृति और सामाजिक समरसता के जीवंत प्रतीक हैं। शरद पूर्णिमा भी ऐसा ही पावन पर्व है, जिसकी चांदनी भारतीय लोकजीवन में धार्मिक श्रद्धा और सांस्कृतिक उल्लास का विशेष भाव जगाती है। इसी परंपरा को आत्मसात करते हुए मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के भानपुरा नगर में श्री सूर्यवंशी कुमरावत तंबोली समाज ने अपने आराध्य देव श्री केशुबावजी महाराज का पांच दिवसीय विवाह महोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। महोत्सव के अंतिम दिन रविवार, 25 अक्टूबर को निकली भव्य शोभायात्रा में समाज की एकजुटता, सनातन सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सद्भाव का अनुपम संगम देखने को मिला। नगर के विभिन्न मार्गों पर जगह-जगह पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया गया।

पुरानी नागर माता मंदिर तीर्थस्थल से निकली शोभायात्रा

शरद पूर्णिमा के अवसर पर दोपहर एक बजे पुरानी नागर माता मंदिर तीर्थस्थल से शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। स्वर्ण एवं रजत कलशों, तीन घुड़सवारों और भगवान श्रीरामजी के बैवाणजी के साथ निकली शोभायात्रा में सैकड़ों युवक-युवतियां, महिलाएं, पुरुष और समाजजन शामिल हुए। धार्मिक आस्था से ओतप्रोत वातावरण में शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। भजन-कीर्तन की धुन पर युवक-युवतियों और महिलाओं ने उत्साहपूर्वक नृत्य किया। श्रद्धा, उल्लास और सामूहिक सहभागिता ने पूरे आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

शोभायात्रा में समाज के लोगों की पारंपरिक सहभागिता के साथ नई पीढ़ी की सक्रिय उपस्थिति भी आकर्षण का केंद्र रही। यह दृश्य इस बात का परिचायक बना कि परंपराएं तभी जीवंत रहती हैं, जब अगली पीढ़ी उन्हें केवल देखती नहीं, बल्कि उनमें सहभागी बनकर उनके सांस्कृतिक अर्थ को भी समझती है।

विभिन्न समाजों और संस्थाओं ने किया आत्मीय स्वागत

भानपुरा में शोभायात्रा का स्वागत केवल एक धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव के अवसर के रूप में भी किया गया। नगर के विभिन्न समाजों, व्यापारिक संगठनों और सेवा संस्थाओं ने पुष्पवर्षा तथा पेय पदार्थों के माध्यम से शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का स्वागत-सत्कार किया।

श्री राम द्वारा व्यायामशाला, गुर्जर समाज भानपुरा, श्री सनातन धर्म मंडल भानपुरा, मालवी प्रजापति समाज, किराना व्यापारी एसोसिएशन भानपुरा, हारे का सहारा सेवा समिति, अंजुमन कमेटी के सदर मोहसिन कुरेशी एवं समाजजन, दाऊदी बोहरा समाज, मेघवाल समाज नवयुवक मंडल समिति, जय माता दी ग्रुप, नगर परिषद भानपुरा, वर्मा डोली समाज, विश्वकर्मा सुथार समाज, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप भानपुरा, गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज तथा युवा सेन समाज के प्रदेश अध्यक्ष विजय भाटिया ने अपने साथियों सहित शोभायात्रा का स्वागत किया। अन्य समाजों और संस्थाओं ने भी आयोजन में सहभागिता निभाई।

विभिन्न सामाजिक और धार्मिक पृष्ठभूमियों से जुड़े लोगों द्वारा किया गया यह स्वागत नगर की साझा सांस्कृतिक विरासत और परस्पर सम्मान की भावना को रेखांकित करता है। ऐसे आयोजन सामाजिक संबंधों को सुदृढ़ करने और सामुदायिक जीवन में आत्मीयता बढ़ाने का अवसर बनते हैं।

मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान, शिक्षा को प्रोत्साहन

धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन के साथ समाज ने शिक्षा और प्रतिभा प्रोत्साहन को भी महत्व दिया। कक्षा 10वीं और 12वीं में 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 10 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। समाजसेविका श्रीमती निर्मला देवी मोहनलाल पहाड़िया, बांसवाड़ा की ओर से विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र और नकद राशि भेंट की गई।

इस सम्मान का उद्देश्य विद्यार्थियों की उपलब्धियों का उत्साहवर्धन करना और समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण को प्रोत्साहित करना रहा। धार्मिक आस्था के साथ शिक्षा, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व को स्थान देना ऐसे आयोजनों के व्यापक महत्व को दर्शाता है।

समाज के पदाधिकारी और गणमान्यजन रहे उपस्थित

आयोजन में मध्य प्रदेश कुमरावत तंबोली समाज के अध्यक्ष एडवोकेट वीरेंद्र पटेल, वरिष्ठ समाजसेवी सुमन चौरसिया, पन्नालाल भाना, अनिल मोदी, समाज अध्यक्ष शिवाजी बंबोरिया, सचिव राजेश निम्बोदिया, कोषाध्यक्ष विकास पहाड़िया तथा नवयुवक मंडल कुमरावत तंबोली समाज के अध्यक्ष अंशुल कलावड़िया सहित सैकड़ों समाजजन उपस्थित रहे।

शोभायात्रा और सम्मान समारोह के बाद सामूहिक सहभोज का आयोजन किया गया। इसके साथ ही रात्रि में आराध्य देव श्री केशुबावजी महाराज का विवाह महोत्सव जारी रहा।

परंपरा, प्रकृति और लोकविश्वास का सांस्कृतिक संबंध

श्री सूर्यवंशी कुमरावत तंबोली समाज में केशुबावजी महाराज के विवाह महोत्सव की परंपरा का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। समाज की मान्यता में केशुबावजी महाराज को पान की खेती का रक्षक माना जाता है। पान की खेती अपनी संवेदनशील प्रकृति के कारण मौसम और तेज हवाओं से प्रभावित हो सकती है। ऐसे में आराध्य देव की पूजा और विवाह महोत्सव के माध्यम से कृषि, प्रकृति और आजीविका के प्रति सम्मान का भाव भी अभिव्यक्त होता है।

यह परंपरा केवल भानपुरा तक सीमित नहीं है। मालवा के विभिन्न क्षेत्रों तथा राजस्थान के निकटवर्ती इलाकों में भी समाजजन इस महोत्सव को श्रद्धा के साथ मनाते हैं। क्षेत्रीय लोकविश्वासों और पारिवारिक-सामुदायिक परंपराओं के माध्यम से ऐसे आयोजन समाज की सांस्कृतिक स्मृति को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाते हैं।

इस परंपरा को कृषि संरक्षण की आधुनिक वैज्ञानिक व्यवस्था का विकल्प मानने के बजाय इसे प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, खेती से जुड़े जीवन और सामुदायिक आस्था के सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में देखना अधिक उपयुक्त है।

सार्थक दृष्टिकोण — श्रद्धा से समरसता तक

शरद पूर्णिमा पर भानपुरा में निकली श्री केशुबावजी महाराज की भव्य शोभायात्रा अनेक अर्थों में महत्वपूर्ण रही। यह आयोजन जहां समाज की आराध्य देव के प्रति श्रद्धा का प्रकटीकरण है, वहीं विभिन्न समाजों और संस्थाओं की सहभागिता सामाजिक सद्भाव की सुंदर तस्वीर भी प्रस्तुत करती है। पुष्पवर्षा से स्वागत करने वाले हाथ यह संदेश देते हैं कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान समाज को जोड़ने का माध्यम बन सकता है।

सनातन संस्कृति की विशेषता उसकी निरंतरता और विविधता में निहित है। यहां पर्व और उत्सव केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं रहते, बल्कि परिवार, समाज, प्रकृति, शिक्षा और सेवा जैसे जीवन-मूल्यों से भी जुड़ते हैं। केशुबावजी महाराज का विवाह महोत्सव इसी लोक-सांस्कृतिक परंपरा का उदाहरण है, जिसमें आराध्य के प्रति आस्था के साथ नई पीढ़ी की सहभागिता, मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान और सामूहिक सहभोज जैसे सामाजिक आयाम भी सम्मिलित हैं।

भानपुरा का यह आयोजन याद दिलाता है कि परंपराओं की वास्तविक शक्ति केवल उनके भव्य आयोजन में नहीं, बल्कि उन मूल्यों में होती है जिन्हें वे समाज के भीतर जीवित रखती हैं। जब श्रद्धा के साथ शिक्षा, उत्सव के साथ सेवा और धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव जुड़ता है, तब संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं रहती, बल्कि वर्तमान को दिशा देने वाली जीवंत शक्ति बन जाती है।

यही है सनातन परंपरा का सार्थक चिंतन—आस्था से संस्कार, संस्कार से समरसता और समरसता से सशक्त समाज की ओर बढ़ते कदम।

✍️ राजेश कुमरावत ‘सार्थक’

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