श्रीमद्द भागवत कथा में श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग, श्रद्धालुओं ने की पुष्पवर्षा
जनमत जागरण न्यूज़ @ सुसनेर
स्थानीय वार्ड क्रमांक 04 सत्यनारायण गली स्थित अक्षपाद स्कूल धर्मशाला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कथावाचक पंडित ब्रम्हाप्रकाश भट्ट ने श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग सुनाया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह को एकाग्रता से सुना श्रीकृष्ण-रुक्मणि का वेश धारण किए सोनाली शर्मा व आशु शर्मा पर भारी संख्या में आए श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने विवाह के मंगल गीत गाए। भट्ट ने कहा कि रुक्मणी विदर्भ देश के राजा भीष्म की पुत्री और साक्षात लक्ष्मी का अवतार थी। रुक्मणी ने जब देवर्षि नारद के मुख से श्रीकष्ण के रूप, सौंदर्य एवं गुणों की प्रशंसा सुनी तो उसने मन ही मन श्रीकृष्ण से विवाह करने का निश्चय किया। रुक्मणी का बड़ा भाई रुक्मी श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था और अपनी बहन का विवाह चेदिनरेश राजा दमघोष के पुत्र शिशुपाल से कराना चाहता था। रुक्मणी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने एक ब्राह्मण संदेशवाहक द्वारा श्रीकृष्ण के पास अपना परिणय संदेश भिजवाया। तब श्रीकृष्ण विदर्भ देश की नगरी कुंडीनपुर पहुंचे और वहां बारात लेकर आए शिशुपाल व उसके मित्र राजाओं शाल्व, जरासंध, दंतवक्त्र, विदु रथ और पौंडरक को युद्ध में परास्त करके रुक्मणी का उनकी इच्छा से हरण कर लाए। वे द्वारिकापुरी आ ही रहे थे कि उनका मागज् रुक्मी ने रोक लिया और कृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा। तब युद्ध में श्रीकृष्ण व बलराम ने रुक्मी को पराजित करके दंडित किया। तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने द्वारिका में अपने संबंधियों के समक्ष रुक्मणी से विवाह किया। भागवत कथा के विश्राम पर वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाशनारायण बजाज, शिवभक्त मण्डल के मोहन टेलर, युगलकिशोर परमार, गोविंद भाटी, सतीश सोनी, आशाराम बापू योग वेदांत समिति के भेरूलाल सोनी, बजरंग मठ अखाड़ा के भरत भावसार एवं अन्य सभी सदस्यों द्वारा आरती कर प्रसादी का वितरण किया गया। गुरुवार को कथा का समापन होगा।
चित्र : कथावाचक पंडित ब्रम्हप्रकाश भट्ट का साफा बांधकर कर स्वागत करते वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाशनारायण बजाज एवं शिवभक्त मण्डल के सदस्य।



