द्वार उद्घाटन के साथ अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव की हुई पूर्णाहुति
आचार्यश्री व साध्वी मंडल का नागेश्वर तीर्थ के लिए हुआ विहार

जनमत जागरण न्यूज़ @ नलखेड़ा
नगर में जैन समाज के चल रहे धार्मिक आयोजन के अंतिम दिवस रविवार को नूतन जिनालय दादावाड़ी के द्वार उद्घाटन ,
सत्तरभेदी पूजन, दादा गुरुदेव पूजन के साथ अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव की पूर्णाहुति हुई । कार्यक्रम में पावन निश्रा प्रदान करने के लिए पधारे आचार्यश्री व साध्वी मंडल का विहार नलखेड़ा से नागेश्वर तीर्थ की और हुआ ।
जैन श्वेताम्बर समाज द्वारा नगर से 2 किलोमीटर दूर गुदरावन मार्ग पर श्री पार्श्व कुशल सूरी नूतन जिनालय दादावाड़ी में अंजनशलाका प्रतिष्ठा का 10 दिवसीय धार्मिक आयोजन 29 अप्रेल से प्रारंभ हुआ था । महोत्सव के अंतिम दिवस रविवार को प्रातः ब्रम्ह महूर्त में नूतन जिनालय का द्वार उद्घाटन लाभार्थी अभयकुमार हिम्मतमल मुणोत परिवार तथा नूतन दादावाड़ी का द्वार उद्घाटन लाभार्थी प्रकाशचंद प्रशांत सकलेचा परिवार द्वारा खरतरगच्छाचार्य शासन प्रभावक श्री जिन पीयूषसागर सुरिश्वरीजी महाराज सा द्वारा अपने मुखारविंद से बोले गए मंत्रोच्चार के साथ किया तथा मंदिर पट ( दरवाजे) पर लगे चाँदी के ताले को खोलकर उपस्थित श्री संघ को परमात्मा एव दादा गुरुदेव के दर्शन करवाए गए। इस मौके पर आचार्य श्री एव साध्वी चन्दनबालाजी द्वारा चैत्य वंदन विधि करवाई गई।
इसके पूर्व लखुंदर नदी तट से बैंड बाजों के साथ चल समारोह निकाला गया जिसमें लाभार्थी परिवार पूजन सामग्री लेकर चल रहे थे।
रविवार को ही मन्दिर जी मे सत्तर भेदी पूजन लाभार्थी कोमलचन्द मोतीलाल बंम द्वारा करवाई गई।
दादा गुरुदेव पूजन लाभार्थी रमेशचंद अटल कुमार सकलेचा परिवार द्वारा दादावाड़ी में करवाई जिसमें आचार्यश्री ने अपने श्री मुख से सुमधुर भजनों के साथ पूजन सपंन्न करवाई पूजन में बड़ी संख्या में समाज जन शामिल थे।
आचार्य श्री व साध्वी मंडल ने किया विहार
प्रतिष्ठा महोत्सव कार्यक्रम में पावन निश्रा प्रदान करने के लिए आचार्य श्री जिन पीयूष सागर सुरिश्वरजी व अन्य गुरु भगवन्तों के साथ साध्वी चन्दनबालाश्रीजी आदि साध्वी मंडल का आगमन भी नगर में हुआ था।
रविवार शाम 5 बजे आचार्यश्री व साध्वी मंडल का नागेश्वर तीर्थ के लिए विहार हुआ जहां 12 मई से प्रारंभ होने वाले दस दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेंगे।
परमात्मा की हुई अंगी रचना

नूतन जिनालय में विराजित मूल नायक परमात्मा श्री पार्श्वनाथ जी की प्रतिष्ठा के बाद पहली मनमोहक अंगिरचना की गई अंगिरचना नगर के ही सुरेश कुमार कांठेड़ द्वारा की गई



