राष्ट्र का गौरव जागृत करना है तो स्वाभिमान और बलिदानों की परंपरा को अगली पीढ़ी को सिखाना पड़ेगा
स्वराज का अमृत महोत्सव कार्यक्रम में विहिप के केंद्रीय पदाधिकारी अमरीश सिंह जी ने कहा
जनमत जागरण न्यूज @ सोयतकलां
भारत की स्वाधीनता के लिए भारत के कई वीर योद्धाओं ने अपने प्राण न्यौछावर किए तब जाकर हमें स्वाधीनता मिली। हमें इतिहास में अकबर बाबर औरंगजेब जैसे आक्रांताओं को महान बता कर हमें गुमराह किया गया जबकि मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वालों को स्थान में कोई उचित स्थान नहीं मिला अब भारत जाग चुका है एवं सच्चाई से सभी अवगत हो रहे हैं उक्त बाद विश्व हिंदू परिषद केंद्रीय सहमंत्री एवं विशेष सरह संपर्क प्रमुख अमरीश सिंह जी ने स्वराज का अमृत महोत्सव कार्यक्रम के तहत मंगलवार देर शाम सरस्वती शिशु मंदिर में कहीं।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मंचासीन विश्व हिंदू परिषद केंद्रीय सहमंत्री एवं विषय विशेष सहसंपर्क प्रमुख अमरीश सिंह उपस्थित थे साथ में विश्व हिंदू परिषद प्रांत मंत्री सोहन विश्वकर्मा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खंड सरसंघचालक द्वारकीलाल पाटीदार मंचासीन थे। सर्वप्रथम मंचासीन अतिथियों द्वारा भारत मां का पूजन किया गया

अतिथियों का परिचय स्वराज अमृत महोत्सव समिति के जिला सदस्य जितेंद्र शर्मा ने करवाया । अतिथियों का स्वागत सम्मान राजेश भावसार इमलीवाले ने किया। कार्यक्रम का संचालन राजेश परिहार ने किया आभार नगर कार्यवाह सुनील गायरी ने व्यक्त किया।
मुख्य वक्ता केंद्रीय मंत्री ने आगे अपने उद्बोधन में कहा कि भारत के वीर योद्धाओं ने अपने मान बिंदु के लिए निरंतर संघर्ष किया वह जानते थे आक्रांताओं की बड़ी सेनाओं से वह जीत नहीं सकते लेकिन फिर भी 500-1000- 2000 की सैनिक टुकड़ियों को लेकर प्रभु श्री राम के जन्म स्थल अयोध्या के लिए कई बार संघर्ष किए इन संघर्षों में उन्होंने अपने प्राणों की आहुतिया दी और वह अच्छी तरह से जानते थे कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा एक ना एक दिन प्रभु श्री राम का मंदिर भव्य बनेगा जिनका का सपना साकार हुआ। उन्होंने आगे कहा जब स्वाधीनता मिली तो दस लाख हिंदूओ की हत्या की गई वहीं डेढ़ करोड़ हिंदू परिवारों की विस्थापना हुई लेकिन तत्कालीन राजतंत्र दीपावली मना रहा था वही जब धर्म के आधार पर भारत मां के सीने के टुकड़े करते हुए देश को बांट दिया गया अब 75 वर्ष बाद धर्म विशेष के लोगों को अपना अलग कानून चाहिए तो भारत में क्यों रुके भारत में एक विधान एक ही संविधान रहेगा। जो भारत मां की जय कार नहीं लगा सकता भला हमारा भाई कैसे हो सकता है उन्होंने आगे कहा कि पहले जब विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष या राजदूत आते थे तो उन्हें ताज महल दिखाया जाता था एवं जाते समय ताजमहल का मॉडल का गिफ्ट दिया जाता था क्योंकि भारत में और कोई स्थान उनकी नजर में दिखाने लायक नहीं था अब भारत में विभिन्न राष्ट्रों के राष्ट्राध्यक्ष या राजदूत आते हैं तो उन्हें गंगा महाआरती दिखाई जाती है एवं विदाई के समय श्रीमद्भागवत गीता भेंट की जाती है अब मेरा भारत बदल रहा है। अभी तो एक फाइल खोली गई है मौतों के उपरांत कई फाइलें खोली जाएगी एवं भारत मां के साथ जिन्होंने अन्याय किया उन्हें किसी भी स्थिति में प्रायश्चित का मौका तक नहीं दिया जाएगा।

स्व का जागरण आवश्यक-
विश्व हिंदू परिषद प्रांत मंत्री सोहन विश्वकर्मा ने स्व का आत्मबोध ही स्वाधीनता का अमृत महोत्सव का मूल मंत्र हैं। हम भारत माता के लिए गौमाता के लिए स्व मतलब स्वयं क्या कर रहे। हम बाजार से प्लास्टिक की थैली मे कोई भी सामान खरीदकर ला रहे है तो उस प्लास्टिक की थैली को कहा फेक रहे है कही भारत मा को गंदा तो नही कर रहे अनजाने मे प्लास्टिक की थैली यहा वहा फेक देते है जिसे गोमाता सेवन कर लेती हैं जिनके कारण उनकी मौत हो जाती है। जागरूक बनकर भारत मां की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहना स्वतंत्रता अमृत महोत्सव का मूल मंत्र है। वही कार्यक्रम प्रारंभ से पूर्व भजन गायक अमित नागर व टीम ने अपनी मधुर वाणी से भारत माता के चरणों में अपना शीश नवाता राष्ट्र भक्ति गीत से कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं को मंत्र मुक्त करते हुए मन जीत लिया। स्वराज का अमृत महोत्सव कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला पुरुष सम्मिलित हुए।



