नियम को ताक में रखकर बिना सूचना और मुआवजा के कर रहे हैं अधिग्रहण की कार्यवाही
मामला- नगर में निकल रहे निर्माणाधीन एनएच 552 जी का
– विधायक श्री राणा ने कहा कलेक्टर और नेशनल हाईवे अधिकारी से बात कर नियमानुसार दिलवाया जाएगा मुआवजा
– पीड़ित को प्रति कर लेने का है अधिकार -हाई कोर्ट एडवोकेट श्री बांगड़
– पीड़ित भवन और दुकानदार मालिक कर रहे हैं आंदोलन की तैयारी

जनमत जागरण न्युज @ सोयत कलां
झालरापाटन से उज्जैन तक 133 किलोमीटर नेशनल हाईवे का निर्माण कार्य चल रहा है। नगर में हाईवे बनाने के कारण सैकड़ों मकानों दुकानों को अधिग्रहण करने की कार्यवाही निर्माण एजेंसी द्वारा की जा रही है । अधिग्रहण की कार्यवाही में बिना लिखित सूचना और मुआवजा दिए मकानों दुकानों को तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है । इससे आम जन में आक्रोश है ।
शुक्रवार को नगर में दर्जनों दुकानदारों ,भवन मालिकों का प्रतिनिधिमंडल विधायक श्री विक्रम सिंह राणा तथा एसडीएम श्री सोहन कनास से मिले । विधायक श्री राणा ने कहा कि मैं शनिवार को कलेक्टर और एनएचआई के डायरेक्टर से बात करके सभी पीड़ित भवन मालिकों व दुकानदारों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने के लिए बात करूंगा।
जानकारी के अनुसार आपको बता दें कि सोयतकलां नगरीय क्षेत्र में अधिग्रहण और मुआवजे के लिए अभी तक किसी भी प्रकार का कोई सर्वे नहीं हुआ है बिना सर्वे के अधिग्रहण की कार्यवाही की जा रही है ,जो न्यायोचित नहीं है नगर की बात करें तो माचलपुर चौराहे से लेकर थाना लगभग 80 से 90% लोग प्रभावित हैं।
– उच्च न्यायालय में लगायेगे पिटिशन
नगर में भवन व दुकानदार के पक्षकार हाई कोर्ट एडवोकेट श्याम मुरारी बांगड़ ने कहा कि सोमवार को भवन मालिकों की तरफ से एक याचिका सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी एसडीओ महोदय को दी जावेगी और उस में स्थगन आदेश मांगा जाएगा कि जब तक प्रतिकार ना मिले तब तक तोड़फोड़ ना की जाए। यदि एसडीओ महोदय आदेश नहीं देते हैं या आवेदन खारिज करते हैं , तो उच्च न्यायालय इंदौर के समक्ष पिटिशन लगाई जावेगी ।
– पीड़ित को प्रतिकार लेने का है अधिकार
हाई कोर्ट एडवोकेट श्री बांगड़ ने बताया कि हमारे पक्षकारों का भूमि अर्जन एवं पुनर्वास अधिनियम 2013 के तहत उचित प्रतिकार लेने का अधिकार है । अधिनियम 2013 में धारा 90-94-95 में स्पष्ट है कि उचित प्रतिकार का निर्धारण कलेक्टर महोदय करें ।
लेकर रहेंगे हम मुआवजा नगर में पीड़ित
दुकानदार और भवन मालिक घनश्याम रामानुज, दिलीप चावंडिया, रमेश चंद्र मोदी, रवि पांवडिया, राजु विश्वकर्मा ,घनश्याम भावसार, प्रदीप शर्मा, पंकज पांवडिया, रामबाबू बैरागी, आदि ने बताया कि हम यहां लगभग 60-70 सालों से रह रहे हैं हमारे दादा परदादा हमारे लिए पुश्तैनी मकान बना कर गए हैं। स्टेट हाईवे , नेशनल हाईवे तो बाद में बना हमारे पास मकान की रजिस्ट्री नामांतरण है खसरा बीवन की नकल के साथ हम कई दशकों से शासन, नगर परिषद व पंचायत के जमाने से हम संपत्ति कर भवन कर आज तक देते आ दे रहे हैं । नियम के विरुद्ध शासन हमें बिना मुआवजा दिए हमारे मकान व दुकानों पर अधिकरण कर रहे हैं । हम बिना मुआवजा लिए कार्यवाही नहीं होने देंगे , अगर हमें मुआवजा नहीं मिला तो हम प्रदर्शन कर आंदोलन करेंगे ।



