महायज्ञ के समापन 80 लोगों ने ली आध्यात्मिक विवाह की दीक्षा
24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ के समापन पर हुए कई कार्यक्रम , तंदुरुस्ती के लिए जरूरी है पुंसवन संस्कार
जनमत जागरण@सोयतकलां
जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को संस्कार करना चाहिए । संस्कार का महत्व बताते हुए कहा कि संस्कार हीन व्यक्ति का जीवन पशु के समान होता है । गुरु का महत्व बताते हुए कहा कि गुरु हमें नर से नारायण बनाते हैं इसलिए मानव जीवन में सभी को गुरु की आवश्यकता होती है । भगवान श्रीराम को भी गुरु वशिष्ठ विश्वामित्र ने शिक्षा दी थी। विश्वामित्र ने भगवान राम को गायत्री सावित्री की शक्ति दी थी । भगवान राम ने भी 16 संस्कारों की शिक्षा ली थी। उक्त बात शुक्रवार को छतरी कॉलोनी में आयोजित गायत्री महायज्ञ के समापन के चौथे दिन शांतिकुंज हरिद्वार से आई ब्रह्मवादिनी बहनों की टोली के प्रमुख संध्या तिवारी ने महायज्ञ, गायत्री मंत्र, संस्कार और गुरु आदि विषयों महायज्ञ में अपने उद्बोधन में कहीं
उन्होंने आगे कहा कि गायत्री मंत्र की चारों वेदों की उत्पत्ति हुई है इसके माध्यम से व्यक्ति परमात्मा के समीप पहुंच सकता है उन्होंने बताया कि यज्ञ के माध्यम से व्यक्ति देव ऋण से मुक्त हो सकता है ।

80 लोगों ने ली आध्यात्मिक विवाह की दीक्षा
आध्यात्मिक विवाह अर्थात दीक्षा संस्कार में लोगों ने बुराई व्यसन छोड़ने का, नित्य गायत्री चालीसा गायत्री महामंत्र जप स्वाध्याय , मिशन की पत्र पत्रिकाएं अखंड ज्योति निर्माण योजना गुरुदेव द्वारा रचित साहित्य जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया । महायज्ञ के दौरान दीक्षा लेने वाले लोगों को यज्ञ के आध्यात्मिक महत्व के साथ ही वैज्ञानिक महत्व के बारे में भी जानकारी देते हुए बताया कि देवी देवता अग्निमुख यानी यज्ञ में हमारे द्वारा श्रद्धा पूर्वक डाली गई ,आहुतियां के माध्यम से सामग्री ग्रहण करते हैं जबकि यज्ञ में होम की गई सामग्री से हमारा परिवेश शुद्ध होता है इसलिए हमारे ऋषि-मुनियों को सनातन काल से महत्व देते आए हैं ।
तंदुरुस्ती के लिए जरूरी है पुंसवन संस्कार
हिंदू धर्म संस्कारों में पुंसवन संस्कार दुसरा संस्कार संस्कार है जो गर्भधारण के 3 माह पश्चात किया जाता है, क्योंकि गर्भ में 3 माह के पश्चात गर्भ शिशु का मस्तिष्क विकसित होने लगता है गर्भधारण के समय से ही शिशु का विकास होने लगता है यह विकास सही तरीके से हो इसीलिए पुंसवन संस्कार किया जाता है ।



