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लो…बिछ गई चुनावी बिसात, मैदान में प्रत्याशी आठ , बागी बने निर्दलीय बिगाडेंगे भाजपा-कांग्रेस का समीकरण

निर्दलीय लगा सकते है भाजपा-कांग्रेस के परम्परागत वोटों में सेंध, बदल सकते है हार-जीत का गणित

जनमत जागरण @ सुसनेर से संजय जैन

गुरूवार को विधानसभा चुनाव 2023 के लिए नाम वापसी के अंतिम दिन एक निर्दलीय उम्मीदवार के द्वारा अपना नामांकन फार्म वापस ले लिये जाने के बाद अब कूल 8 उम्मीदवार चुनावी रण में बच गए है। गुरूवार की दोपहर में 3 बजे के बाद निर्वाचन कार्यालय सुसनेर ने निर्वाचन अधिकारी एवं सुसनेर एसडीएम मिलिंद ढोके के द्वारा शेष बचे इन आठो ही प्रत्याशीयों को चुनाव चिन्हो का आंवटन भी किया गया है। नाम वापसी के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई की कूल 8 प्रत्याशी चुनावी मैदान में है। लेकिन इनमें खास बात यह है की भाजपा से बागी बनकर निर्दलीय चुनाव लडने वाले पूर्व विधायक संतोष जोशी और कांग्रेस से बागी बनकर निर्दलीय मैदान में उतरे नलखेडा निवासी जितेन्द्र उर्फ जीतू पाटीदार ने अपना नामांकन वापस नहीं लिया है। इससे अब ये कयास लगाए जा रहे है की यह दोनो ही निर्दलीय भाजपा-कांग्रेस के परम्परागत वोटरों में सेंध लगा सकते है। इन बागियो को भाजपा-कांग्रेस ने मनाने का भी प्रयास नहीं किया। इसलिए अब ये तगडा नुकसान दोनो ही पार्टीयो को पहुंचाएंगे। यही कारण है की भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशीयों की तर्ज पर ही इनका जनसम्पर्क भी तेजी से चल रहा है और सोशल मीडिया भी यह खुब सुर्खियां बटोर रहे है।

जीतू पाटीदार का कहना है की इस बार कांग्रेस ने बाहरी व्यक्ति के अपना उम्मीदवार बनाया है जिनकी छवि भी साफ नहीं है। इसलिए जनता की मांग पर वे निर्दलीय चुनाव लड रहे है तो वही भाजपा के संतोष जोशी सुसनेर विधानसभा में अराजकता का माहोल बताते हुएं पहले से ही अपनी पार्टी से इस्तिफा देकर निर्दलीय चुनाव लडने का ऐलान कर चुके है और अब भी मैदान में डटे हुएं है। संतोष जोशी पूर्व में संघ के जिला प्रचारक रहे है उसके बाद सुसनेर विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी से विधायक भी रहे। इसलिए उनका सतत सम्पर्क आज भी मतदाताओ से है। जिसका उनको फायदा भी मिल रहा है। तो वही कांग्रेस से बागी बने जीतू पाटीदार के साथ न सिर्फ कांग्रेस प्रत्याशी से नाराज कार्यकर्ता है बल्की वे स्वयं पाटीदार समाज से आते है जिस समाज की भूमिका प्रत्याशीयों की हार-जीत को तय करने में अहम रहती है। और इनके वोटरो की संख्या भी लगभग 35 हजार के लगभग है। ऐसा माना जा रहा है की जीतू के साथ पाटीदार समाज के अधिकांश वोट भाजपा और कांग्रेस के है। इसलिए जीतू इस बार दोनो ही प्रमुख राजनेतिक दलो के प्रत्याशीयों की हार-जीत का समीकरण भी बिगाडेंगे।

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