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बालिका को नहीं बनने दी वधू , बाल विवाह रुकवाया

 समाज कुरीतियों को समाप्त कर बाल विवाह मुक्त समाज बनाने में सहयोग करें- श्रीमती मनीषा चौबे, परियोजना अधिकारी सुसनेर 

जनमत जागरण @ सोयतकलां :: महिला बाल विकास विभाग सुसनेर के अधिकारियों ने शनिवार को समीपस्थ ग्राम कंठालिया का खेड़ा में हो रहे बाल-विवाह को रुकवाया । महिला बाल विकास विभाग सुसनेर की परियोजना अधिकारी श्रीमती मनीषा चौबे ने बताया कि बाल संरक्षण समिति को नाबालिग लड़की के विवाह की शिकायत मिली थी । शिकायत पर कार्रवाई करते हुए बाल विवाह को रुकवाया गया है। समीपस्थ ग्राम कंठालिया का खेड़ा निवासी एक नाबालिग बालिका उम्र 16 वर्ष के बाल विवाह की शिकायत बाल संरक्षण समिति को प्राप्त हुई थी ।

जनहित में जारी – जनमत जागरण वेब न्यूज़ पोर्टल
  महिला बाल विकास विभाग सुसनेर की परियोजना अधिकारी श्रीमती मनीषा चौबे एवं पर्यवेक्षक सुश्री रेणु पंथ ने आयोजन स्थल पर पहुंचे और शिकायत का परीक्षण किया ।  शिकायत  सही पाए जाने पर आयोजन स्थल पर बालिका की माता व परिजन को बाल विवाह  प्रतिषेध अधिनियम 2006 की जानकारी दी एवं अवगत कराया की 18 वर्ष से कम उम्र की बालिका एवं 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के का विवाह 2006 अधिनियम का उल्लंघन है जिसके कठोर कानूनी प्रावधान है । समझाईश के बाद नाबालिक बालिका की माता ने बाल विवाह नहीं करने की सहमति देते हुए विवाह स्थगित किए जाने की लिखित सहमति दी । श्री चौबे ने कहा कि समाज जागरुक बनें ओर समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त कर बाल विवाह  मुक्त समाज बनाएं ओर प्रशासन का सहयोग करें । 
कंठालिया खेड़ा में समझाईश के बाद नाबालिक बालिका की माता ने बाल विवाह नहीं करने की सहमति देते हुए विवाह स्थगित किए जाने की लिखित सहमति दे ते हुए।
बाल विवाह हुआ तो जाने कौन-कौन होंगे दोषी :: बाल विवाह करने, करवाने अथवा प्रोत्साहन देने वाले व्यक्ति जिसके अंतर्गत पंडित, नाई, बाराती अथवा बारात में शामिल बाराती, बैंड बाजे वाला, हलवाई, टैंट वाला, स्थान उपलब्ध कराने वाला अथवा ऐसा व्यक्ति जिसकी जानकारी के बावजूद भी बाल विवाह करवाया जा रहा है वे सभी दोषी होंगे । 
- यह है कानून ::  दो साल तक हो सकती है जेल1 नवंबर, 2007 को बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 लागू हुआ। सरकार ने शादी के लिए 18 वर्ष की उम्र लड़की और 21 वर्ष की उम्र लड़के के लिए निर्धारित कर रखी है। इससे कम उम्र में विवाह करने पर बाल विवाह की श्रेणी में माना जाता है। इसके लिए 2 वर्ष तक की जेल और एक लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। गैर जमानती अपराध है।

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