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•• ईर्ष्यालु मनुष्य को प्रकृति से लेना चाहिए प्रेरणा – कथावाचक श्री अलखनंदा दीदी ने कहा

 •• मक्के की राबड़ी का भोग महाप्रसाद के रूप में भक्तो को किया वितरण •लोकदेवता भगवान श्री देवनारायण का जन्मोत्सव मनाया धूमधाम के साथ ,•• इर्ष्यालु व्यक्ति अपने जीवन में कभी तरक्की नहीं कर सकता - कथावाचक श्री अलखनंदा दीदीने कहा 

जनमत जागरण @ नलखेड़ा -:: इर्ष्यालु व्यक्तियों को भगवान सूर्य, वायु, नदियों, बादलों व वृक्षों इत्यादि से प्रेरणा लेनी चाहिए। भगवान सूर्य बिना किसी भेदभाव के सृष्टि के सभी प्राणियों को अपना प्रकाश देते हैं। वायु सभी जीवों में प्राणों का संचार करती है। बादल परोपकार के लिए गरजते हुए वर्षा करते है, नदियां किसी से नहीं पूछती कि तुम मेरा जल क्यों पीते हो और वृक्ष भी किसी व्यक्ति से यह नहीं पूछते कि तुम मेरे फल क्यों तोड़ते हो ।

उक्त बात श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन अलकनंदा दीदी ने कथा का रसपान कराते हुए श्रद्धालुओं को कहीं । उन्होंने आगे कथा में मनुष्य के स्वभाव के बारे में बताया कि स्वार्थी मानव इर्ष्यालु होता जा रहा है। यदि अपना उद्धार करना चाहते हो तो परोपकार में अपना जीवन लगाओ, जिससे तुम्हारा कल्याण होगा। कथा में वामन भगवान की झांकी दिखाई गई । जिनका सभी कार्यकर्ताओं , श्रद्धालुओं, श्रोताओ द्वारा भव्य स्वागत किया गया ।

•• इर्ष्यालु व्यक्ति अपने जीवन में कभी तरक्की नहीं कर सकता - कथावाचक श्री अलखनंदा दीदीने कहा :: मंदिर प्रांगण में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन गुरुवार को कथावाचक श्री अलखनंदा दीदी  ने भक्तों को भगवान वामन अवतार व समुद्र मंथन का प्रसंग सुनाया उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा सुनने से मनुष्य के कई जन्मों के पापों का क्षय हो जाता है। हमें भागवत कथा सुनने के साथ साथ उसकी शिक्षाओं पर भी अमल करना चाहिए। उन्होंने बताया कि वामन अवतार के रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि को यह शिक्षा दी कि दंभ और अंहकार से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता और यह धन संपदा क्षण भंगुर होती है। इसलिए इस जीवन में परोपकार करों। उन्होंने बताया कि अहंकार, गर्व, घृणा और ईर्ष्या से मुक्त होने पर ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। इर्ष्यालु व्यक्ति अपने जीवन में कभी तरक्की नहीं कर सकता। 
 •• इर्ष्यालु व्यक्ति अपने जीवन में कभी तरक्की नहीं कर सकता - कथावाचक श्री अलखनंदा दीदीने कहा :: मंदिर प्रांगण में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन गुरुवार को कथावाचक श्री अलखनंदा दीदी ने भक्तों को भगवान वामन अवतार व समुद्र मंथन का प्रसंग सुनाया उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा सुनने से मनुष्य के कई जन्मों के पापों का क्षय हो जाता है। हमें भागवत कथा सुनने के साथ साथ उसकी शिक्षाओं पर भी अमल करना चाहिए। उन्होंने बताया कि वामन अवतार के रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि को यह शिक्षा दी कि दंभ और अंहकार से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता और यह धन संपदा क्षण भंगुर होती है। इसलिए इस जीवन में परोपकार करों। उन्होंने बताया कि अहंकार, गर्व, घृणा और ईर्ष्या से मुक्त होने पर ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। इर्ष्यालु व्यक्ति अपने जीवन में कभी तरक्की नहीं कर सकता। 

•• लोकदेवता भगवान श्री देवनारायण का जन्मोत्सव मनाया धूमधाम के साथ :: भगवान श्री देवनारायण की छठ बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गई इसी कड़ी में प्रति वर्ष अनुसार तहसील समीपस्थ ग्राम पढ़ाना एवम धंदेड़ा के मध्य अति प्राचीन एवम चमत्कारी श्री देवझरी देवनारायण मंदिर में भगवान का जन्मोत्सव मनाया गया । मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया एवम भगवान को 56 भोग लगाया गया । पंचमी शाम से ही जागरण एवम भजन कीर्तन से एवम अन्य कार्यक्रम का आयोजन होता है । सुबह से ही दर्शनों के लिए भक्तो का तांता लग जाता है ।

•• मक्के की राबड़ी का भोग महाप्रसाद के रूप में भक्तो को किया वितरण :: मंदिर की अति प्राचीन परंपरा अनुसार मक्के की राबड़ी का भोग महाप्रसाद के रूप में भक्तो को वितरण किया गया दोपहर् के समय भगवान देवनारायण की प्रतिमा के सामने ध्वजा चढ़ाई गई , उसके बाद भगवान देवनारायण की आरती कर प्रसाद वितरण की गई । इस दौरान बड़ी संख्या में लोग दर्शन आरती करने पहुंचे ।

•• मुख्य पुजारी से चर्चा के दौरान बताया की प्रत्येक शनिवार के दिन साईटका पथरी से सम्बन्धित रोगो का उपचार भी श्री भुणा जी की कृपा से किया जाता है ।

▶️🌘👉🏿••• भड़ाना डिजिटल स्टूडियो यूट्यूब चैनल पर कथा का सीधा प्रसारण चल रहा है जो भी धर्मप्रेमी बंधु कथा पांडाल में नही आ सकते वह अपने घर पर कथा श्रवण कर सकते हैं 🌐

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