सम-सामयिक
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जंतर-मंतर विश्वविद्यालय: BA in आंदोलन | राजनीति और आंदोलन संस्कृति पर तीखा व्यंग्य
क्या आंदोलन अब करियर बन गया है? पढ़िए डॉ. बालाराम परमार 'हँसमुख' का समसामयिक राजनीतिक व्यंग्य, जो शिक्षा, राजनीति और…
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1997 से 2026 : छात्र आंदोलन से शिक्षा मंत्रालय तक, धर्मेंद्र प्रधान के निर्णय ने भारतीय लोकतंत्र को क्या संदेश दिया?
विशेष विश्लेषण – लेखक : राजेश कुमरावत ‘सार्थक’ भारत में शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि…
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दिल्ली जंतर मंतर आंदोलन : लोकतंत्र, सूचना युद्ध और राष्ट्रीय चेतना के सामने खड़े होते नए प्रश्न
दिल्ली जंतर मंतर आंदोलन केवल छात्र विरोध तक सीमित है या इसके पीछे व्यापक वैचारिक, राजनीतिक और सूचना युद्ध की…
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TCS धर्मांतरण केस: जमानत आदेश में भगवान श्रीकृष्ण का उल्लेख, न्यायालय की टिप्पणी पर नया विमर्श
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विश्व साइकिल दिवस विशेष : एआई के युग में साइकिल वाला पत्रकार ✍️लेखक – राजेश कुमरावत ‘सार्थक’
43 साल, तीन साइकिल और एक अटूट संकल्प बजरंगलाल दांगी की असाधारण पत्रकारिता यात्रा समसामयिक लेखक – राजेश कुमरावत ‘सार्थक’ …
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कालापानी की कालकोठरी से उठी वह आवाज, जिसने भारत को आत्मबोध कराया
कालाकालापानी की कालकोठरी से उठी वह आवाज, जिसने भारत को आत्मबोध करायापानी की कालकोठरी से उठी वह आवाज, जिसने भारत…
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विचार जो समाज को जागृत करें – समय से सवाल, समाज को दिशा : पढ़िए विभिन्न राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय समाचार पत्रों में प्रकाशित विचारोत्तेजक लेख एवं समाचार ✍️ लेखक : राजेश कुमरावत ‘सार्थक’ स्वतंत्र लेखक एवं वैचारिक चिंतक
विभिन्न राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय समाचार पत्रों में प्रकाशित विचारोत्तेजक लेख एवं समाचार कटिंग्स 👇 डिग्रियों के जंगल में खोता कौशल…
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सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा में आगर जिले की ऐतिहासिक सहभागिता, श्रद्धा और राष्ट्रभाव के साथ रवाना हुआ 50 श्रद्धालुओं का दल
सोयतकलां, नलखेड़ा सहित जिलेभर से श्रद्धालु ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा’ में शामिल, जयघोषों के बीच हुआ भव्य स्वागत एवं विदाई समारोह…
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“14 अप्रैल: जयंती से आगे—क्या हम अंबेडकर के विचारों को जीवन में उतार पा रहे हैं?”✍️ डॉ बालाराम परमार
✍️ 14 अप्रैल केवल एक जयंती नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है।डॉ. भीमराव अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि उनके विचारों को…
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आशा भोसले ‘ताई’ : “अभी ना जाओ छोड़ कर…” की गूंज में नम आंखें | सुरों की अनमोल विरासत को श्रद्धांजलि
▪️राष्ट्र और संस्कृति के बीच सेतु बनी आवाज़जिसने हर पीढ़ी को एक सूत्र में जोड़ा समसामयिकी लेखक – राजेश कुमरावत…
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