इंदौर
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MP सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत लेपा (कसरावद) में बोले— भारत केवल भूगोल नहीं, सेवा और कर्म ही भारत का स्वभाव
जब सेवा स्वभाव बने, तभी राष्ट्र गढ़ता है भारत— परम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जनमत जागरण @ कसरावद/ इंदौर…
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शिक्षक से साधक तक की रचना-यात्रा : शिवलाल दांँगी के चालीसा संग्रह “धरा से दिव्यता तक” का भव्य विमोचन
नर्मदा साहित्य मंथन के मंच से हुआ विमोचन, राज्यपाल सहित देश के प्रतिष्ठित साहित्यकार रहे उपस्थित धरा से दिव्यता तक…
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“दुनिया ये क्यों चाहिए” म्यूजिक वीडियो लॉन्च: इंदौर के संगीतकार देवेंद्र यादव की संघर्ष और साधना से सजी प्रेरक यात्रा
🎶 इंदौर की संगीत परंपरा में एक और सशक्त स्वर“दुनिया ये क्यों चाहिए” म्यूजिक वीडियो लॉन्चसंघर्ष, साधना और संगीत से…
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“इंदौर की शूटिंग एकेडमी में हिंदू बेटियों को निशाना बना रहा था कोच मोहसिन खान – बजरंग दल ने किया बड़ा खुलासा”
“निशाने पर सपने: जब लक्ष्य ओलंपिक था, लेकिन शिकारी पहले से घात लगाए बैठे थे…” इंदौर की चमकती शूटिंग एकेडमियों…
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क्या मातृभाषाओं का संरक्षण ही संस्कृति की आत्मा है? मातृभाषा हमारी पहचान और आत्मीयता का प्रतीक”– कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, इंदौर के संभागायुक्त ने क्या कहा – जानिए भारतीय भाषा पर्व की खास उपलब्धियां !
जनमत जागरण न्यूज नेटवर्क @ इन्दोर। इंदौर स्थित माई मंगेशकर हाल में भारतीय भाषा पर्व का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें…
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“नर्मदा साहित्य मंथन : शब्द घोष से संस्कृति का पुनर्जागरण” – साहित्य, संवाद, मंथन की वैचारिक धारा, हर शब्द में गूंजा युगों का जयकारा।
👉 यह स्मृति-काव्य “नर्मदा साहित्य मंथन” के मंथन और संवाद से उपजे विचारों को अभिव्यक्त करता है। जब शब्द संस्कृति…
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“मालवांकुर सेवा प्रकल्प : जब युवा डॉक्टर बने जनसेवा के सच्चे प्रहरी!” ➡️ कैसे मेडिकल छात्र गाँव-गाँव जाकर कर रहे हैं नि:स्वार्थ सेवा? जानिए इस अनूठे अभियान की पूरी कहानी।
"मालवांकुर सेवा प्रकल्प: मेडिकल छात्रों की अनूठी यात्रा या जनसेवा का नया संकल्प?" जनमत जागरण न्यूज नेटवर्क इंदौर। चिकित्सा सेवा…
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“समय की कसौटी पर लोकसाहित्य: अतीत की विरासत या भविष्य की अनिवार्यता? क्या लोकसंपृक्त साहित्य ही समाज का भविष्य तय करेगा?”- श्री हेमंत मुक्तिबोध का दृष्टिकोण”
◾विचार मंथन के नये संकल्प के साथ नर्मदा साहित्य मंथन के अहिल्या पर्व का समापन -◾"संवाद से समाधान तक: जानिए…
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क्या नर्मदा साहित्य मंथन से निकले विचार राष्ट्र की नई राह बनाएंगे?” पढ़ें – वैचारिक मंथन में द्वितीय दिवस पर आयें विचारक, चिंतक और साहित्यकारों के नई क्रांति का सूत्रपात करने वाले उद्बोधन
◾"लिव-इन, सिंगल पैरेंटिंग और डिवोर्स सेलिब्रेशन: आधुनिकता या साजिश?" "भारतीय परिवारों पर मंडरा रहा मार्क्सवाद का खतरा?"◾"नर्मदा साहित्य मंथन में…
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“राष्ट्र निर्माण में आचार, विचार और अनुभूति: क्या खंडन-मंडन की भारतीय परंपरा आज भी प्रासंगिक है?” – पढ़ें – नर्मदा साहित्य मंथन के चतुर्थ सोपान के उद्घाटन सत्र में बोले संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री सुरेश सोनी
🚩"माँ नर्मदा और माँ अहिल्या: क्या ये केवल प्रतीक हैं या संपूर्ण सभ्यताओं की आधारशिला?"🚩 "नर्मदा साहित्य मंथन: क्या 'अहिल्या…
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